स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक महाराणा प्रताप को केंद्रीय विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि

 




अजमेर, 17 जून (हि.स.)। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया के अवसर पर महाराणा प्रताप जयंती श्रद्धा, गौरव और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने राष्ट्रनिष्ठा, स्वाभिमान और त्याग के प्रतीक महाराणा प्रताप को नमन करते हुए उनके जीवन और आदर्शों का स्मरण किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। समारोह में कुलपति प्रो. आनन्द भालेराव, प्रभारी कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी प्रदीप अग्रवाल, अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. डी.सी. शर्मा, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कुलपति प्रो. आनन्द भालेराव ने कहा कि भारत के महान राष्ट्रनायकों में महाराणा प्रताप का स्थान अग्रणी है। इतिहास उन लोगों को लंबे समय तक स्मरण नहीं रखता जो केवल अपने लिए जीते हैं, बल्कि उन विभूतियों को याद करता है जिन्होंने राष्ट्र, समाज और मानवीय मूल्यों के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, स्वाभिमान, त्याग और संघर्ष का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। सत्य, न्याय, कर्तव्यनिष्ठा और स्वाभिमान जैसे मूल्यों से युक्त नागरिक ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। युवाओं को महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में आदर्श स्थापित करने चाहिए।

प्रो. भालेराव ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। आज के दौर में त्वरित सफलता की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जबकि वास्तविक सफलता अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहने में निहित है। महाराणा प्रताप का जीवन यही संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान और धैर्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

प्रभारी कुलसचिव एवं वित्त अधिकारी प्रदीप अग्रवाल ने महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी स्वतंत्रता और सम्मान से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने 'घास की रोटी' के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष, त्याग और आत्मसम्मान का अनुपम उदाहरण है, जो आज भी समाज को प्रेरित करता है।

अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. डी.सी. शर्मा ने कहा कि महाराणा प्रताप राजस्थान के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें चुनौतियों से न घबराने, संघर्षों को अवसर में बदलने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विश्वविद्यालय में ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए कुलपति का आभार भी व्यक्त किया।

कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। धन्यवाद ज्ञापन प्रभारी कुलसचिव प्रदीप अग्रवाल ने किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी अनुराधा मित्तल ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष