कृषि विश्वविद्यालय ने अरंडी की हाइब्रिड बीज लाइनों के लिए किया एमओयू
वैज्ञानिकों के काम को मिलेगी पहचान, विश्वविद्यालय को होगा आर्थिक रूप से फायदा
जोधपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर एवं मैसर्स सद्भाव कंज्यूमर्स मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड अहमदाबाद (गुजरात) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन किया गया। यह समझौता कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर द्वारा विकसित अरंडी हाइब्रिड की फीमेल लाइन और मेल लाइन के अरंडी हाइब्रिड प्रजनक बीजों के उत्पादन और मार्केटिंग का नॉन-एक्सक्लूसिव अधिकार प्राप्त करने के लिए किया गया। समझौता ज्ञापन पर कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक, अनुसंधान, डॉ एमएम सुंदरिया एवं मैसर्स सद्भाव कंज्यूमर्स मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, अहमदाबाद के चैयरमेन सुरेश पटेल ने हस्ताक्षर किए।
इस समझौता ज्ञापन पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, साथ ही अरंडी पर काम करने वाले कृषि वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। इस समझौते से जहां कृषि विश्वविद्यालय को आर्थिक रूप से लाभ होगा वही रॉयल्टी भी मिलेगी। उन्होंने बताया इसके साथ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार किए गए बीजों को प्रसिद्धि भी मिलेगी। ग़ौरतलब है कि यह सोसाइटी विभिन्न फसलों के बीजों का उत्पादन और बिक्री करती है।
सोसाइटी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैरेंटल बीजों (मूल बीजों) का गुणन कर सकती है, लेकिन उसे बाजार में पैरेंटल लाइनों के बीजों का उत्पादन और बिक्री करने की अनुमति नहीं होगी।
कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर की लिखित अनुमति के बिना, सोसाइटी इस जेनेटिक मटीरियल का उपयोग किसी भी आगे की ब्रीडिंग या सुधार के लिए नहीं करेगी। इस मौके पर अतिरिक्त निदेशक अनुसंधान (बीज) डॉ आर एस चौधरी एवं अरंडी प्रजनक वैज्ञानिक डॉ ममता नेहरा भी उपस्थित रहीं। विश्वविद्यालय के कुल सचिव समंदर सिंह भाटी ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश