मानसून प्लान में निगम फेल, जोन कार्यालयों में ही पड़े रह गए पौधे

 


जयपुर, 17 अगस्त (हि.स.)। नगर निगम शहर को हरा भरा करने के मानसून प्लान में फेल होता नजर आ रहा है। नगर निगम प्रशासन ने शहर में 2.36 लाख पौधे लगाने व बांटने का प्लान तैयार किया था। इसके लिए सरकारी नर्सरियों से पौधे भी खरीद लिए गए, लेकिन बांटने व लगाने के काम को पूरी तरह से अंजाम नहीं दे पाया है। ऐसे में नगर निगम गुलाबी नगरी को पॉल्यूशन मुक्त और हरा भरा कैसे बना पाएगा। मालवीय नगर जोन उपायुक्त मुकुट चौधरी ने बताया कि अब कितने पौधे बांटे गए इसकी मुझे जानकारी नहीं है। मैं अभी एक बड़े सरकार कार्यक्रम के आयोजन की तैयारी में व्यस्त हूं। पता कर कल बता पाऊंगा।

नगर निगम की उद्यान शाखा ने आमजन को पौधे बांटने का काम सभी जोन उपायुक्तों को दिया था। नगर निगम में करीब 13 जोन है। उद्यान शाखा ने पौधे खरीद कर सभी जोन कार्यालयों को भिजवा दिए, लेकिन जोन उपायुक्त पौधे बांटने के काम को अंजाम नहीं दे पाए। अधिकांश जोन कार्यालयों में रखे पौधे अब सूखने लगे है। संवाददाता ने विभिन्न जोन कार्यालयों पर जाकर देखा तो कहीं पार्क में तो कहीं जोन कार्यालय के एक कोने में पौधे रखे मिले। वहां पर न तो कोई पौधा लेने वाला मिला ना बांटने वाला। देखभाल के अभाव में अब ये पौधे सूखने लगे है।

महापौर का कार्यकाल 9 नवम्बर 2025 को पूरा हो गया था। इसके बाद से निगम को प्रशासक संभाल रहे है। पार्षद नहीं होने से पहली बार निगम प्रशासन ने बड़े पौधे नहीं खरीदें। यहीं वजह है कि पहली बार निगम शहर में हरियाली बढ़ाने के काम को अंजाम देने में विफल रहा है। इस साल निगम ने पौधे खरीदने का टेंडर नहीं किया। आमजन को बांटने के लिए सरकारी नर्सरी से एक से दो फीट के पौधे खरीदे गए, जिनमें आमजन से ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। हरियालो राजस्थान के तहत निगम ने सरकारी नर्सरियों से ये पौधे खरीदे थे। इस बार नगर निगम शहर के प्रमुख चौराहों, डिवाइडर, स्कूल, कॉलेजों में भी पौधारोपण नहीं करवाया पाया। वर्तमान में जयपुर की आबादी करीब 50 से 60 लाख के बीच है। जयपुर शहर में कुल ग्रीन स्पेस करीब 31 प्रतिशत है। शहर में पौधों का आच्छादन लगभग 12 प्रतिशत है। राजस्थान सरकार ने मिशन हरियालो के तहत प्रदेशभर में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जयपुर नगर निगम में 150 वार्ड है।

जयपुर में हर साल जेडीए और निगम के अलावा वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर लाखों पौधे लगाए जा रहे है। इसके बाद भी जयपुर में साल दर साल पॉल्यूशन स्तर बढ़ता जा रहा है। राजधानी जयपुर में आमजन को साल में 20 दिन ही शुद्ध हवा नसीब हो रही है। जहरीली हवा में मौजूद बारीक कण सिर्फ फेफड़े ही नहीं दिमाग की नसों तक पहुंच रहे हैं। किडनी तक डैमेज होने का खतरा बढ़ रहा है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम की ताजा रिपोर्ट बताती है कि जयपुर का हर नागरिक अपनी औसत उम्र के 3 साल 10 महीने और 24 दिन सिर्फ जहरीली हवा के कारण कम कर रहा है। रिपोर्ट में सामने आया कि जहरीली हवा में इतने खतरनाक कण मौजूद हैं, जो सांस से हमारे शरीर में जा रहे हैं। इससे प्रदेश के हर व्यक्ति की उम्र औसतन 3 साल 3 महीने और 18 दिन घट रही है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट में राजस्थान का भिवाड़ी प्रदूषण के मामले में देश का 7वां सबसे प्रदूषित शहर रहा था। सबसे ज्यादा आबादी राजधानी जयपुर में रहती है। जयपुर में रहने वाले लोग औसत से भी 7 महीने ज्यादा उम्र खो रहे हैं। अगर आप जयपुर में रह रहे हैं, तो लगभग 1,424 दिन प्रदूषण की भेंट चढ़ रहे हैं। इसका मतलब यह है कि जयपुर का हर तीसरा दिन प्रदूषण के उस खतरनाक स्तर पर होता है, जिसके संपर्क में लंबे समय तक रहने पर सांस और हार्ट संबंधी रोग हो सकते हैं। जयपुर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए 344.7 करोड़ खर्च किए गए। इसके बावजूद पीएम10 (धूल के कणों) का स्तर अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। जहां 2017-18 में बेस वैल्यू लगभग 170 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी, वहीं 2021-22 में इसमें गिरावट देखी गई। लेकिन हाल के वर्षों में यह फिर से बढ़कर 140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के आसपास पहुंच गया है। यह स्तर सरकार द्वारा निर्धारित 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के सुरक्षित मानक से दो गुने से भी अधिक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश