ज्ञान को राष्ट्र निर्माण में लगाएं, यही दीक्षांत का सार : राज्यपाल
जोधपुर, 19 मार्च (हि.स.)। राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नव जीवन की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान का उपयोग राष्ट्र और समाज के उत्थान में करें तथा अपने लक्ष्य निर्धारित कर सतत प्रयास के साथ आगे बढ़ें। राज्यपाल बागडे गुरुवार को एमबीएम विश्वविद्यालय जोधपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। दीक्षांत समारोह में कुल 645 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं एवं कुल 15 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया।
उन्होंने कहा कि सपने केवल देखने से नहीं, बल्कि कठोर परिश्रम से साकार होते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझना भी है।
विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला :
उन्होंने तकनीकी शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला होते हैं। तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, अन्यथा इसका विवेकहीन उपयोग नुकसानदायक हो सकता है।
एआई सहायक है, परंतु मानव मस्तिष्क का स्थान नहीं ले सकती :
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई सहायक है, परंतु मानव मस्तिष्क का स्थान नहीं ले सकती। विद्यार्थियों को इसके उपयोग में विवेक बनाए रखना चाहिए। राज्यपाल ने देश में हो रहे तकनीकी विकास, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष अनुसंधान, 5जी तकनीक और स्टार्टअप संस्कृति का उल्लेख करते हुए युवाओं से इन क्षेत्रों में नवाचार और शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘स्टैंडअप इंडिया’ जैसी पहलों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया।
पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक :
बागडे ने कहा कि प्रधानमंत्री उच्चत्तर शिक्षा अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय को प्राप्त 20 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग शैक्षिक गुणवत्ता और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित 5जी स्पेक्ट्रम प्रयोगशाला, पेट्रोलियम अध्ययन और प्रस्तावित पेट्रो कैम्पस को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार पर बल देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। खेजड़ी जैसे पेड़ों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश