नौतपा की प्रचंड तपिश में बाबा बर्फानी बने मसाणिया धाम के भैरूनाथ

 








भीलवाड़ा, 25 मई (हि.स.)। नौतपा की प्रचंड गर्मी जहां आमजन को बेहाल कर रही है, वहीं आस्था की शीतल छांव में भक्त अपने आराध्य को भी राहत पहुंचाने में जुट गए हैं। भीलवाड़ा के पंचमुखी मुक्तिधाम स्थित प्राचीन श्री मसानिया भैरुनाथ मंदिर में इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। आज नौतपा की शुरूआत होते ही यहां भक्तों ने मिलकर बाबा भैरूनाथ को 3100 किलो बर्फ से सजाकर “बाबा बर्फानी” का दिव्य स्वरूप प्रदान किया, जिसने पूरे शहर में आकर्षण और आस्था का वातावरण बना दिया।

पंचमुखी श्मशान भूमि के मध्य स्थित मसाणिया धाम वर्षों से लोगों की अटूट श्रद्धा का केंद्र रहा है। मान्यता है कि यहां विराजमान बाबा भैरूनाथ अपने भक्तों की हर पीड़ा हर लेते हैं और संकटों से रक्षा करते हैं। नौतपा की भीषण गर्मी में जब तापमान लगातार बढ़ रहा है, तब भक्तों ने अपने आराध्य को शीतलता पहुंचाने के लिए अनूठी सेवा भावना दिखाई। मंदिर परिसर को बर्फ की सफेद चादरों से सजाया गया और बाबा को “बाबा बर्फानी” के रूप में श्रृंगारित किया गया।

श्रद्धालुओं ने बताया कि जिस प्रकार भक्त गर्मी से राहत पाने के लिए शीतल उपाय करते हैं, उसी भाव से बाबा को भी ठंडक पहुंचाने की यह सेवा की गई है। इस दिव्य श्रृंगार को देखने के लिए सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। पूरा मंदिर परिसर “जय भैरूनाथ” के जयकारों से गूंज उठा।

मंदिर पुजारी रवि कुमार सोलंकी ने बताया कि नौतपा के पहले दिन विशेष पूजा-अर्चना के साथ बाबा को 108 लीटर शीतल शरबत का भोग लगाया गया। बाद में यह शरबत भक्तों में प्रसाद रूप में वितरित किया गया। इसके साथ ही लीची जैसे शीतल फलों से विशेष श्रृंगार और भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में स्थित बाबा गुप्तेश्वर महादेव मंदिर तथा शमशान काली मां जगदंबा का भी बर्फ से मनोहारी श्रृंगार किया गया। सफेद बर्फ के बीच विराजित देवी-देवताओं का यह अलौकिक स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।

श्रद्धालु यश सिंह ने बताया कि मसाणिया धाम केवल मंदिर नहीं बल्कि लोगों की गहरी आस्था और विश्वास का केंद्र है। बाबा भैरूनाथ के प्रति श्रद्धा के चलते भक्त स्वयं आगे आकर सेवा कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। किसी ने बर्फ की व्यवस्था की तो किसी ने शरबत और प्रसाद की सेवा संभाली।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद