रक्षाबंधन पर सजे बाजार: 500 से अधिक तरह की राखियों की धूम

 






जयपुर, 26 अगस्त (हि.स.)। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। सावन पूर्णिमा की तिथि दो दिन रहने के कारण पर्व की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, लेकिन पंचांग गणना और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाना उचित रहेगा। खास बात यह है कि इस बार राखी बांधने के समय भद्रा का व्यवधान नहीं रहेगा। इससे बहनें दिनभर शुभ समय में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।

वहीं रक्षाबंधन को लेकर जयपुर के बाजारों में भी पर्व की रौनक दिखाई देने लगी है। शहर के प्रमुख बाजार जौहरी बाजार, बापू बाजार, त्रिपोलिया बाजार, नाहरगढ़ रोड,कटला , राजा पार्क, वैशाली नगर, मानसरोवर और टोंक रोड में राखियों और उपहारों की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगी है। साथ ही रंग-बिरंगी राखियों और आकर्षक उपहारों से सज गए हैं। इस बार पारंपरिक राखियों के साथ आधुनिक डिजाइन की राखियों की भी बड़ी श्रृंखला उपलब्ध है। दुकानों पर 500 से अधिक तरह की राखियां बिक्री के लिए आई हैं। बच्चों से लेकर युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक पसंद रखने वाले ग्राहकों के लिए अलग-अलग श्रेणियों में राखियां उपलब्ध हैं। इस बार बाजारों में केवल जयपुर ही नहीं,बल्कि कोलकाता, मुंबई और गुजरात से मंगवाई गई रंग-बिरंगी और डिजाइनर राखियों की भी जमकर खरीदारी हो रही है।

कार्टून और खिलौना शैली की राखियां बच्चों को भा रहीं

दुकानदार नरेश अग्रवाल ने बताया कि बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए बाजार में मोटू-पतलू, सुपरहीरो, कार्टून पात्र, जानवरों, गाड़ियों, लॉलीपॉप और रंग-बिरंगी कैंडी जैसी डिजाइन वाली राखियां आई हैं। कई राखियों में खिलौने, रोशनी और आकर्षक सजावट के साथ चॉकलेट भी दी जा रही है। इससे बच्चों के लिए राखी अब केवल रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि छोटे उपहार का रूप लेती जा रही है।

युवाओं के लिए कंगननुमा, आकर्षक और आधुनिक डिजाइन की राखियां पसंद की जा रही हैं। वहीं, नाम, तस्वीर और संदेश वाली व्यक्तिगत राखियों की भी मांग है। क्यूआर कोड और एनएफसी तकनीक आधारित डिजिटल राखियां भी बाजार में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

चूड़ा राखी और लुंबा के नए डिजाइन

सुहागिन महिलाओं और भाभियों के लिए चूड़ा राखियों की कई नई डिजाइन बाजार में आई हैं। पत्थर जड़ाई, कुंदन, मोती, शीशा जड़ाई, लटकन, जरी और रंग-बिरंगे धागों से तैयार राखियां ग्राहकों को पसंद आ रही हैं। भाई-भाभी के लिए मिलते-जुलते लुंबा और राखी के विशेष मेल भी उपलब्ध हैं।

चांदी, क्रिस्टल और अन्य महंगी सामग्री से बनी राखियां भी ग्राहकों का ध्यान खींच रही हैं। इसके अलावा हनुमान चालीसा, नजर रक्षा और धार्मिक प्रतीकों वाली राखियों की भी मांग है।

मिठाई, उपहार और सूखे मेवों की दुकानों पर भी रौनक

राखी बाजार के साथ मिठाई, कपड़े, उपहार और सूखे मेवों की दुकानों पर भी खरीदारी बढ़ने लगी है। दूर रहने वाले भाई-बहनों के लिए ऑनलाइन माध्यम से राखी और उपहार भेजने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे रक्षाबंधन अब केवल एक दिन का पारिवारिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले भाई-बहनों को भावनात्मक रूप से जोड़ने वाला पर्व बन गया है।

27 अगस्त को पूर्णिमा, 28 को राखी

पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपरा में रक्षाबंधन के लिए उदया तिथि और भद्रा की स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा।

वीर तेजाजी धाम के पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार 27 अगस्त को पूर्णिमा शुरू होने के साथ भद्रा का प्रभाव रहेगा, इसलिए उस दिन राखी बांधने से बचना चाहिए। 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो जाएगी। ऐसे में राखी बांधने के समय भद्रा बाधक नहीं होगी।

ये रहेंगे राखी बांधने के शुभ समय

पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार 28 अगस्त को चंद्रमा कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। सुबह 7:26 बजे के बाद सुकर्मा योग के साथ बव और बालव करण का संयोग बनेगा।

सुबह 7:26 से 9:48 बजे तक — चर और लाभ चौघड़िया, सुकर्मा योग।

सुबह 9:48 से 10:53 बजे तक — अमृत चौघड़िया।

दोपहर 12:28 से 2:03 बजे तक — अभिजीत मुहूर्त एवं शुभ चौघड़िया।

शाम 5:12 से 6:47 बजे तक — चर चौघड़िया।

भारत में दिखाई नहीं देगा चंद्र ग्रहण

पंडित शर्मा के अनुसार 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में ग्रहण अदृश्य होने के कारण इसका धार्मिक सूतक मान्य नहीं होगा। इसलिए रक्षाबंधन के पर्व और पूजा-विधान पर इसका कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।

सावन पूर्णिमा पर कई पर्वों का संयोग

रक्षाबंधन के साथ इस दिन सावन मास का समापन भी होगा। सावन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पूरे महीने शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना के बाद सावन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। इस बार श्रावणी पूर्णिमा पर गायत्री जयंती, उपाकर्म (श्रावणी कर्म) और विश्व संस्कृत दिवस भी मनाए जाएंगे।

कई घरों में कुलदेवता और इष्टदेव की पूजा के बाद राखी बांधने की परंपरा निभाई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्व को लेकर उत्साह है।

चार साल बाद भद्रा से राहत

पिछले वर्षों में भद्रा के कारण रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के समय को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। 2022 में भद्रा सुबह 10:38 से रात 8:51 बजे तक रही, जिसके चलते 11 और 12 अगस्त को दो दिन पर्व मनाने की स्थिति बनी। 2023 में भद्रा सुबह 10:58 से रात 9:01 बजे तक रही। 2024 में सुबह 9:51 से दोपहर 1:30 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहा। वहीं 2025 में 8 अगस्त दोपहर 2:12 बजे से 9 अगस्त रात 1:52 बजे तक भद्रा रही।

इस बार चार साल बाद रक्षाबंधन भद्रा के व्यवधान से मुक्त रहेगा। ऐसे में बाजारों में बढ़ी रौनक के बीच बहनें 28 अगस्त को शुभ समय में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व मनाएंगी।

28-29 अगस्त को साधारण व एक्सप्रेस बसों में राजस्थान की सीमा तक नि:शुल्क यात्रा

इधर रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महिलाओं और बालिकाओं को रोडवेज बसों में दो दिन नि:शुल्क यात्रा की सौगात दी है। राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार 28 और 29 अगस्त को राजस्थान रोडवेज की साधारण और एक्सप्रेस बसों में राजस्थान की सीमा के भीतर महिलाओं और बालिकाओं को नि:शुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी।

यात्रा के दौरान परिचालक महिलाओं और बालिकाओं को नि:शुल्क यात्रा टिकट जारी करेंगे। यह सुविधा 27 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे से 30 अगस्त की मध्यरात्रि 11:59 बजे तक लागू रहेगी। हालांकि वातानुकूलित, वॉल्वो और अखिल भारतीय अनुज्ञा पत्र पर संचालित बसों में यह सुविधा लागू नहीं होगी। राजस्थान से बाहर की यात्रा के लिए निर्धारित किराया देना होगा।

रक्षाबंधन पर रोडवेज बसों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए सिंधी कैंप सहित प्रमुख बस स्टैंडों पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश