मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग तेज, वनवासी कल्याण परिषद ने सौंपा ज्ञापन

 


जयपुर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। मानगढ़ की पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले जनजातीय बलिदानियों की स्मृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग एक बार फिर उठी है। मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद एवं वनवासी कल्याण आश्रम की ओर से ज्ञापन सौंपकर केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया।

संगठन ने मांग की कि इस ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देकर इसके संरक्षण, विकास और ऐतिहासिक महत्व को व्यापक पहचान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित किया गया। इसे जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रेषित करते हुए संगठन ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए दिए गए बलिदान का प्रतीक है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि गोविंद गुरु के नेतृत्व में संचालित भगत आंदोलन ने जनजातीय समाज में सामाजिक सुधार, जागरूकता, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया था। 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन की गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बाल आंदोलनकारियों ने अपने प्राण गंवाए थे।

संगठन ने इस घटना को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का महत्वपूर्ण और मार्मिक अध्याय बताते हुए कहा कि इस बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान मिलनी चाहिए।

ज्ञापन के अनुसार, भगत आंदोलन जनजातीय समाज को सामाजिक शोषण और अन्यायपूर्ण औपनिवेशिक व्यवस्था से मुक्ति दिलाने की चेतना से जुड़ा था। मानगढ़ का इतिहास राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय समाज की साझा विरासत का भी प्रतिनिधित्व करता है।

संगठन ने ज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम की यात्रा और राष्ट्रपति की 4 अक्टूबर 2024 की यात्रा का उल्लेख किया। ज्ञापन के अनुसार, इन अवसरों पर मानगढ़ के ऐतिहासिक महत्व और जनजातीय बलिदानियों के योगदान को रेखांकित किया गया था।

इसके साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसा और अगस्त 2022 में प्रस्तुत शोध-आधारित रिपोर्ट का हवाला देते हुए मानगढ़ पहाड़ी को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित करने की मांग दोहराई गई।

परिषद ने मांग की कि मानगढ़ धाम को बिना विलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए।

साथ ही, इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संरक्षण एवं विकास की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से परिचित हो सकें।

परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलना जनजातीय समाज के त्याग और बलिदान को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। संगठन ने सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों से इस मांग के समर्थन में एकजुट प्रयास करने की अपील की।

ज्ञापन सौंपने के दौरान नरेंद्र कुमार, विभाग संगठन मंत्री; गौरव गुप्ता, विभाग मंत्री; चिंताराम सहरिया, जिला अध्यक्ष; राकेश भील, जिला संगठन मंत्री; भारत पोरवाल, जिला उपाध्यक्ष; गौरव अग्रवाल; रघुवीर महाराज; ऋषभ महाराज; पदम गौतम, जिला सहकोषाध्यक्ष; गंगाराम मीणा, जिला कोषाध्यक्ष; भोगीलाल सहरिया; मेघराज मीणा; बृजेश गुप्ता, व्यवस्था प्रमुख; लालाराम; विजेंद्र सिंह; ओमप्रकाश; भगवान; भगवानलाल; गिरिराज; विष्णुप्रसाद; केशव; सोनू चौधरी और सुरेश कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित