महापौर चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा विवाद, पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ समेत चार निष्कासित
पाली, 19 सितंबर (हि.स.)। नगर निगम महापौर चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद अब अनुशासनात्मक कार्रवाई तक पहुंच गया है। कांग्रेस की ओर से अधिकृत महापौर प्रत्याशी सुमित्रा जैन के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में डटी राजबाला हिंगड़ समेत चार लोगों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
निष्कासित किए गए लोगों में पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़, पाली शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हकीम भाई और वार्ड 33 से कांग्रेस प्रत्याशी रहे सोहन पारख शामिल हैं।
जिला कांग्रेस कमेटी के संगठन महामंत्री जोगाराम सोलंकी की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देश, जिला कांग्रेस अध्यक्ष शिशुपाल सिंह निंबाड़ा के निर्देशन और पाली विधायक भीमराज भाटी की अनुशंसा पर की गई। आदेश में आरोप लगाया गया है कि राजबाला हिंगड़ ने 18 सितंबर को नाम वापसी की अंतिम
समय-सीमा तक अपना नामांकन वापस नहीं लिया और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन के खिलाफ चुनाव मैदान में बनी रहीं।
कांग्रेस ने अपने आदेश में कहा है कि अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने से संगठन और पार्टी के समर्पित पार्षदों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इसी आधार पर राजबाला हिंगड़ के साथ उनके पति प्रदीप हिंगड़, शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष हकीम भाई और सोहन पारख के खिलाफ छह वर्ष के निष्कासन की कार्रवाई की गई।
राजबाला हिंगड़ वार्ड 38 से कांग्रेस की निर्वाचित पार्षद हैं, जबकि सुमित्रा जैन वार्ड 34 से कांग्रेस पार्षद हैं। महापौर पद के लिए सुमित्रा जैन कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी हैं। कार्रवाई के बाद पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ ने जिला कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जिला कार्यकारिणी के पास पाली शहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष को निष्कासित करने का अधिकार नहीं है। इस बयान के साथ निष्कासन कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के भीतर अधिकार और संगठनात्मक प्रक्रिया का विवाद भी सामने आ गया है।
पाली नगर निगम के 65 वार्डों के चुनाव परिणाम के बाद महापौर पद को लेकर कांग्रेस की ओर से सुमित्रा जैन और भाजपा की ओर से नमिता बुबकिया को अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया है। राजबाला हिंगड़ के निर्दलीय मैदान में बने रहने से कांग्रेस के भीतर का मतभेद अब चुनावी मुकाबले का हिस्सा बन गया है।
महापौर चुनाव से ठीक पहले चार नेताओं पर छह वर्ष की कार्रवाई ने पाली कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित