आरजीएचएस में अनियमितताओं पर बड़ा एक्शन: 31 मेडिकल स्टोरों के औषधि लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त

 


जयपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में फर्जी दावों, दवाओं की कीमतों में अनियमितता और मुनाफाखोरी के मामलों पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी की जांच रिपोर्ट के आधार पर औषधि नियंत्रक विभाग ने 31 मेडिकल स्टोरों के औषधि लाइसेंस स्थायी रूप से निरस्त कर दिए हैं। लाइसेंस निरस्त होने के बाद ये मेडिकल स्टोर अब दवाओं की खरीद और बिक्री नहीं कर सकेंगे।

इसके साथ ही अतिरिक्त भुगतान की वसूली, टीएमएस निलंबन, डी-पैनलमेंट और अन्य नियमानुसार कार्रवाई भी जारी है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के निर्देशन में राज्य सरकार आरजीएचएस में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने बताया कि जांच में कई मेडिकल स्टोरों द्वारा चिकित्सकों और लाभार्थियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी दावे प्रस्तुत करने के मामले सामने आए हैं।

जांच में कुछ मामलों में चिकित्सकों के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया, जबकि औषधियों के स्थान पर गैर-भुगतान योग्य वस्तुओं के भी दावे प्रस्तुत किए गए।

इन मामलों को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए संबंधित मेडिकल स्टोरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई। स्थायी रूप से निरस्त किए गए औषधि लाइसेंसों में सर्वाधिक 11 मेडिकल स्टोर जयपुर जिले के हैं। इसके अलावा भरतपुर के 9, नागौर और धौलपुर के 2-2 तथा हनुमानगढ़, भीलवाड़ा, सीकर, जोधपुर और अलवर के एक-एक मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं।

आरजीएचएस के तहत प्रतिदिन प्रस्तुत होने वाले दवा दावों की अब विभिन्न स्तरों पर गहन जांच की जा रही है। संभावित अनियमितताओं की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली का उपयोग शुरू किया गया है।

इस तकनीक के माध्यम से कृत्रिम मूल्य वृद्धि, असामान्य एमआरपी, गलत मूल्य निर्धारण, अप्रमाणित दावे, गलत उत्पाद मैपिंग और भ्रामक जानकारियों वाले मामलों की स्वतः पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि हालिया जांच में कई महंगी दवाओं के दावों में गंभीर मूल्य अनियमितताएं सामने आई हैं। एक्सेम्प्टिया 40 एमजी, डेनबेरी इंजेक्शन, टेरिफ्रैक और ट्रुलिसिटी 1.5 एमजी जैसी दवाओं पर बाजार मूल्य की तुलना में अत्यधिक दरों पर दावे प्रस्तुत किए गए।

इसके अलावा आरजीएचएस नियमों के तहत अनिवार्य न्यूनतम छूट भी कई मेडिकल स्टोरों ने नहीं दी। जहां न्यूनतम 40 प्रतिशत छूट अपेक्षित थी, वहां कुछ मामलों में केवल 12 प्रतिशत या उससे भी कम छूट दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ दवाओं पर खरीद मूल्य से दो से पांच गुना तक अधिक राशि के दावे प्रस्तुत किए गए। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि अनियमितताओं को देखते हुए 10 मेडिकल स्टोरों का टीएमएस अस्थायी रूप से बंद किया गया है। वहीं 13 अन्य मेडिकल स्टोरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर नियमानुसार जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि दवा दावों में मुनाफाखोरी और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार नई कार्ययोजना भी तैयार कर रही है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित