साइबर पुलिस का बड़ा एक्शन: 15 हजार 326 मोबाइल नंबर और 7 हजार 800 ऑनलाइन प्रोफाइल जांच के दायरे में

 


जयपुर, 30 सितंबर (हि.स.)। बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसईएएम) और अश्लील व आपत्तिजनक सामग्री के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा (आर4सी) के राज्यव्यापी अभियान में बड़ी तकनीकी कार्रवाई सामने आई है।

साइबर क्राइम ब्रांच को नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (एनसीएमईसी) सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से करीब 25 हजार विशिष्ट डेटा इनपुट और अलर्ट मिले थे। तकनीकी सत्यापन के बाद पुलिस ने संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों से जुड़े नंबरों, प्रोफाइल और उपकरणों को कार्रवाई के दायरे में लिया है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि प्रारंभिक कार्रवाई में 15 हजार 326 संदिग्ध मोबाइल नंबर और सिम की पहचान कर संबंधित सेवा प्रदाताओं को भेजा गया है। इसके अलावा करीब 7 हजार 800 संदिग्ध यूआरएल और ऑनलाइन प्रोफाइल ब्लॉक करवाए गए हैं। पुलिस ने 100 इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जिनमें स्मार्टफोन और हार्ड डिस्क आदि शामिल हैं, को भी चिन्हित कर जांच के दायरे में लिया है।

साइबर क्राइम शाखा आर4सी, जिला पुलिस बलों के साथ समन्वय कर कार्रवाई कर रही है। एनसीएमईसी से प्राप्त प्रमाणित डेटा इनपुट के आधार पर चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ सहित विभिन्न जिलों के स्थानीय थानों में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार साइबर सुरक्षा प्रणालियों के माध्यम से टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, गूगल ड्राइव, वाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक सहित विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, भंडारण, प्रदर्शन, डाउनलोड या किसी भी रूप में प्रसार में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर संबंधित धाराएं तय की जा रही हैं।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि बाल यौन शोषण सामग्री अथवा किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को देखना, डाउनलोड करना, सहेजना या फॉरवर्ड करने से बचें। ऐसी गतिविधियां कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आती हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश