धूं—धूं जलती रही लंका, प्रभुश्रीराम और पवनपुत्र हनुमान के जयकारों से गूंजता रहा रामलीला प्रांगण

 




उदयपुर, 16 अक्टूबर (हि. स.)। झीलों की नगरी में मानो इन दिनों त्रेतायुग जीवंत हो उठा है। निम्बार्क महाविद्यालय सूरजपोल के रामलीला प्रांगण में श्रीराम लीला समिति के तत्वावधान में आयोजित हो रहे भव्य रामलीला महोत्सव के आठवें दिन शुक्रवार को मंच पर ऐसे भावुक और रोमांचक प्रसंग सजे कि पूरा पंडाल भक्ति और उद्गारों से गूंज उठा। माता शबरी की अनन्य प्रतीक्षा, प्रभु श्री राम के चरणों में उनका समर्पण, श्रीराम-सुग्रीव की अटूट मित्रता और इसके बाद संकटमोचन हनुमान जी के अशोक वाटिका में पराक्रम और लंका दहन के सजीव और अद्भुत दृश्यों ने यहाँ मौजूद हर दर्शक के रोंगटे खड़े कर दिए।

शुक्रवार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और पवित्र प्रसंग—शबरी मिलन से हुई। जब प्रभु श्री राम ने माता शबरी के प्रेम और उनकी अनन्य भक्ति का मान रखते हुए उनके जूठे बेर सहर्ष ग्रहण किए, तो दर्शक दीर्घा में बैठी कई आँखें नम हो गईं। यह भावपूर्ण दृश्य साकार कर गया कि भगवान सिर्फ और सिर्फ सच्चे भाव के भूखे हैं।

इसके तुरंत बाद श्रीराम-सुग्रीव मित्रता और किष्किंधा कांड के मनमोहक दृश्यों ने मंच पर ऐसी ऊर्जा भरी कि तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा प्रांगण गूंज उठा। धर्म और न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए प्रभु राम और वानर सेना के मिलन ने दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।

जब माता सीता की खोज और पवनपुत्र हनुमान के लंका प्रवेश का प्रसंग आया, तो रामलीला का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया। आयोजन समिति द्वारा विशेष रूप से प्रांगण में अशोक वाटिका का सुंदर और सजीव सेट तैयार किया गया था। अहंकारी रावण की लंका को चुनौती देते हुए जब पवनपुत्र हनुमान ने प्रतीकात्मक लंका का दहन किया, तो प्रतीकात्मक आतिशबाजी और प्रकाश व्यवस्था के बीच उठती लपटों ने मानो साक्षात त्रेतायुग को उदयपुर में उतार दिया। इस दृश्य को देखकर बच्चों, युवाओं और बुजुर्ग सभी ने बजरंगबली के जयकारों से गगन गुंजा दिया।

श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए बताया कि रामलीला का समापन 18 अक्टूबर को होगा। इसके बाद समिति की ओर से 20 अक्टूबर को सेक्टर-14 में भव्य रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर विप्र फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक सुशील ओझा ने कहा कि समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यक्ति की भूमिका के लिये रामचरितमानस का प्रत्येक पात्र आदर्श है। राम का आदर्श ही विसंगत वर्तमान को बदलने व आसुरी प्रवृत्तियों का दमन करने में सहायक होगी।

इस अवसर पर राष्ट्रीय कवि सिद्धार्थ देवल ने काव्यपाठ करते हुए मेवाड़ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का वर्णन करते हुए राणा सांगा की विषयक कविता का पाठ किया।

समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को विप्र फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक सुशील ओझा, कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र सिंह, सूचना व जनसम्पर्क विभाग के उपनिदेशक गौरीकांत शर्मा, विफा राष्ट्रीय महासचिव के के शर्मा, प्रमोद पालीवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेश्याम सिखवाल, खटीक समाज के अध्यक्ष शैलेन्द्र चौहान, राष्ट्रीय कवि हिम्मत सिंह उज्ज्वल, सिद्धार्थ देवल, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष शंभूसिंह राठौड़, रामकृपा शर्मा, चंद्रभान सिंह शक्तावत,

समाजसेवी दिनेश पण्ड्या, फतहनगर के पूर्व मंडल अध्यक्ष मन्नालाल लावटी, पूर्व पार्षद बद्रीलाल सोनी, ओमप्रकाश खोखावत, महेश सेवा संस्थान के अध्यक्ष राजेश राठी, निरंजन राठी, शिक्षक नेता भंवर सेठ, गायत्री शक्तिपीठ राजसमंद के घनश्याम पालीवाल, पालीवाल महासभा मेवाड़ के महामंत्री भंवरलाल पालीवाल, गिरिजा शंकर पालीवाल, स्टेनवर्ड स्कूल के निदेशक सत्यप्रकाश मूंदड़ा, शिक्षाविद् डॉ. चंद्रशेखर चौबीसा, समाजसेवी यशवंत पालीवाल, ओमप्रकाश खोखावत अतिथि रहे। सभी अतिथियों का उपरणा ओढ़ाकर सम्मान किया गया।

सभी अतिथियों का सम्मान अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी, डॉ. विजय विप्लवी, समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, चेतन माली, राकेश पालीवाल, चैनशंकर दशोरा, धरणीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, निर्मल चौबीसा, दीपक डांगी, एडवोकेट दिनेश गुप्ता, गोपाल कनेरिया, जगदीश मेनारिया, प्रभाष सुखवाल, रोहित चौबीसा आदि कार्यकर्ताओं ने किया।

रामलीला संयोजक डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी ने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 9 अक्टूबर से शुरू हुई दस दिवसीय राम लीला के नौवें दिन शनिवार को रामलीला में 'श्रीराम सेना प्रस्थान', 'विभीषण शरणागति', 'सेतुबंध रामेश्वरम स्थापना', 'अंगद-रावण संवाद' और अत्यंत मर्मस्पर्शी 'लक्ष्मण शक्ति' के दृश्यों का मंचन किया जाएगा। इसके बाद रविवार 18 अक्टूबर को 'रावण संहार' के साथ दस दिवसीय इस ऐतिहासिक धार्मिक और सांस्कृतिक महोत्सव का उल्लासमयी समापन होगा। उल्लेखनीय है कि पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान वृंदावन के प्रमुख वेदप्रकाश भारद्वाज, सीताराम भारद्वाज एवं घनश्याम शर्मा के सान्निध्य में 40 कलाकार रामलीला का सजीव मंचन कर रहे हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता