राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में मनाई भगवान धन्वंतरि की जयंती
बीकानेर, 06 नवंबर (हि.स.)। गंगाशहर स्थित राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में शुक्रवार को धनतेरस के अवसर पर भगवान धन्वंतरि की जयंती श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सुबह 8 से 11 बजे तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों ने भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना में भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य यजमान समाजसेवी एवं दयानंद पब्लिक स्कूल के संचालक भरत ठोलिया एवं उनकी पत्नी भंवरी देवी रहे। उनके हाथों वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान धन्वंतरि का विधिवत पूजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में करपात्री जी के शिष्य, प्रसिद्ध दंडी महात्मा एवं देवीकुंड सागर आश्रम के अधिष्ठाता श्रीधर जी महाराज उपस्थित रहे।
इस अवसर पर श्रीधर जी महाराज ने कहा कि भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के जनक हैं। आयुर्वेद भारत की ऐसी अमूल्य चिकित्सा पद्धति है, जिसे आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। यह केवल रोगों का उपचार ही नहीं, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने की समग्र जीवनशैली भी प्रदान करता है। भगवान धन्वंतरि का संपूर्ण सृष्टि पर बड़ा उपकार है। उन्होंने कहा कि राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र भगवान धन्वंतरि के बताए मार्ग पर चलते हुए प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से मरीजों का उपचार कर रहा है। यह सराहनीय पहल है। उन्होंने केंद्र की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
केंद्र के मंत्री बनवारी लाल शर्मा एवं उपाध्यक्ष श्रीभगवान अग्रवाल ने श्रीधर जी महाराज सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान भगवान धन्वंतरि का दही, दूध, शहद आदि से अभिषेक किया गया। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को केले एवं सिंघाड़े का प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में धर्म प्रेमी कमल भाम्भू, योगाचार्य श्रीरतन तंबोली, शिवकुमार वर्मा, महावीर उपाध्याय, कुणाल तंवर, शंकरलाल परिहार, कविता सुथार, कृष्णा कच्छावा, सुनीता प्रजापत, डॉ. राजेंद्र नागल, कैलाश पंचारिया, मयंक बोथरा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव