लोकमंथन यात्रा का डूंगरपुर में हुआ भव्य स्वागत, यात्रा में झलकी वागड़ की लोकसंस्कृति
डूंगरपुर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय लोकसंस्कृति और ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकली लोकमंथन यात्रा का डूंगरपुर में भव्य स्वागत किया गया। ‘हम भारत के लोग’ थीम पर आधारित यात्रा के दौरान वागड़ की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोककलाओं की जीवंत झलक देखने को मिली। लोकगीतों, जनजातीय नृत्यों और मावजी महाराज की रासलीला की प्रस्तुतियों ने अतिथियों का मन मोह लिया।
यात्रा के डूंगरपुर पहुंचने पर तिजवड़ चौराहे पर विद्या भारती की ओर से स्वागत किया गया। संस्कार भारती के पालकत्व में पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों और मंगलगीतों के बीच यात्रियों की अगवानी हुई। इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेतृत्व में शोभायात्रा और वाहन रैली निकाली गई, जो हनुमानजी मंदिर होते हुए कालीबाई पैनोरमा और गैप सागर की पाल तक पहुंची। यहां अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सहयोग से मंत्रोच्चार के साथ मावजी महाराज की चरण-पादुकाओं का पूजन किया गया। अतिथियों ने संत मावजी के जीवन और उनकी परंपरा के बारे में जानकारी प्राप्त की।
इसके बाद यात्रा से जुड़े बौद्धिककर्ताओं ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में आयोजित गोष्ठी में भाग लिया। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पालकत्व में हुई गोष्ठी के बाद यात्रा विजयराजे सिंधिया सभागार पहुंची। यहां स्थानीय लोककलाकारों ने मंगलगीत और नृत्य के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया। सभागार के प्रवेश द्वार पर लघु उद्योग भारती की हस्तशिल्प प्रदर्शनी तथा अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से स्थानीय साहित्यकारों और लोककलाओं पर आधारित साहित्य प्रदर्शनी लगाई गई।
सभागार में आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में बंजारा समाज के लोकनृत्य, जनजातीय समाज के गैर नृत्य और मावजी महाराज के जीवन परिचय पर आधारित प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। विद्या भारती संस्कार केंद्र नादिया के कलाकारों ने बंजारा लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि विद्यानिकेतन गोकुलपुरा के कलाकारों ने जनजातीय गैर नृत्य से समां बांधा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से मावजी महाराज के जीवन और रासलीला का मंचन किया गया। चिखली विद्या निकेतन ने जनजातीय समाज पर आधारित सामूहिक गीत, गोकुलपुरा की बहनों का समूह नृत्य और साद समाज की ओर से मावजी महाराज के जीवन पर आधारित गीत भी प्रस्तुत किया गया।
लोकमंथन यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने यात्रा के उद्देश्यों और विभिन्न क्षेत्रों में मिले अनुभवों को साझा किया। उन्होंने माताओं और बहनों से आग्रह किया कि वे बच्चों को स्थानीय मंगलगीतों, लोरियों, वात्सल्य गीतों, भजनों, लोककथाओं और लोकनायकों की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से भावी पीढ़ी को परिचित कराना जरूरी है, ताकि भारतीय संस्कृति की विरासत आगे भी संरक्षित रहे।
कार्यक्रम का समापन सामूहिक वंदे मातरम् गान के साथ हुआ। आयोजन में विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता निभाई। भोजन व्यवस्था के बाद लोकमंथन यात्रा ने प्रभात ग्राम सिलोही के लिए प्रस्थान किया। यात्रा के अगले चरण की व्यवस्थाओं का दायित्व अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने संभाला। यात्रा में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार और अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष