मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ‘जीरो डंपसाइट’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को मिल रही गति

 


जयपुर, 12 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के शहरों को स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल एवं सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के 152 नगरीय निकायों में लगभग 75 लाख घन मीटर लिगेसी वेस्ट (पुराने कचरे) के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए 310 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

यह परियोजना ‘जीरो डंपसाइट’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस परियोजना के अन्तर्गत पुराने कचरे के निस्तारण के साथ ही इन स्थलों पर आधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिससे भविष्य में नए डंपिंग ग्राउंड बनने की संभावना भी कम होगी और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत होने से शहरों के विकास को नई दिशा मिलेगी।

152 नगरीय निकायों में क्रियान्वयन

प्रदेश के 152 नगरीय निकायों में क्रियान्वित की जा रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 30 नगरीय निकायों में 24 लाख घन मीटर से अधिक लिगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए कार्यादेश तथा 40 नगरीय निकायों में 35 लाख घनमीटर से अधिक कार्यों के लिए एलओए जारी किए जा चुके हैं।

वहीं, 82 नगरीय निकायों में लगभग 16 लाख घन मीटर से अधिक कचरे के निस्तारण के लिए निविदा प्राप्त कर तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लक्ष्यों को मिलेगा बल

केन्द्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत ‘जीरो डंपसाइट’ का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए डंपसाइट रेमिडिएशन एक्सेलेरेटर प्रोग्राम प्रारम्भ किया गया है, जिसके माध्यम से देशभर में पुराने कचरे के ढेरों का वैज्ञानिक निस्तारण तेज गति से किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के अन्तर्गत राजस्थान में नवम्बर 2025 से मार्च 2026 तक लगभग 24 लाख घन मीटर लिगेसी वेस्ट का रेमिडिएशन किया जा चुका है।

इसके अन्तर्गत पुराने कचरे को बायोमाइनिंग तकनीक के माध्यम से प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में पुराने कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर पुनः उपयोग योग्य सामग्री निकाली जाती है। मिट्टी जैसी सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण, प्लास्टिक और धातुओं का पुनर्चक्रण तथा ज्वलनशील पदार्थों से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार कर सीमेंट उद्योग और ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किया जाता है। इससे वर्षों पुरानी चुनौती के वैज्ञानिक समाधान के साथ ही संसाधनों का पुनः उपयोग संभव होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित