बीज माफिया पर किरोड़ी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: चमकदार पैकेटों में बिक रहा था किसानों के सपनों का धोखा

 


जयपुर/चौमूं, 26 मई (हि.स.)। राजस्थान में किसानों के भरोसे और उनकी मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले बीज माफियाओं पर आखिरकार सरकार ने बड़ा प्रहार किया है। प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने मंगलवार को चौमूं और गोविंदगढ़ क्षेत्र में अचानक छापेमारी कर नकली बीजों के उस काले कारोबार का खुलासा किया, जो लंबे समय से किसानों को आर्थिक नुकसान और खराब फसल की मार दे रहा था।

मंत्री की इस कार्रवाई को कृषि विभाग का अब तक की सबसे बड़ी “सर्जिकल स्ट्राइक” माना जा रहा है। जैसे ही मंत्री किरोड़ी लाल मीणा अपनी टीम के साथ रीको क्षेत्र स्थित फैक्ट्रियों में पहुंचे, वहां हड़कंप मच गया। कई संचालक और कर्मचारी मौके से गायब हो गए, जबकि अंदर जो तस्वीर सामने आई, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। छापेमारी के दौरान ‘एग्रो जेनिक्स क्रॉप साइंस’, ‘जीएम एग्रो इंडस्ट्रीज’ और गोविंदगढ़ स्थित एसीएस फैक्ट्री में बड़े स्तर पर मूंगफली की पैकिंग का काम चलता मिला।

जांच में सामने आया कि बाजार से सस्ती मूंगफली खरीदकर उसे प्रोसेस किया जा रहा था और फिर “हाई क्वालिटी रिसर्च बीज” बताकर किसानों को बेचने की तैयारी की जा रही थी।

फैक्ट्रियों में किसान-510 (RG-510), SG-551 और RG-578 जैसी उन्नत किस्मों के नाम से पैकिंग सामग्री और लाखों खाली बैग मिले। अधिकारियों ने मौके से हजारों तैयार पैकेट, करीब 60 लाख खाली बोरियां और लगभग 2 लाख मूंगफली की बोरियां बरामद कीं। यह पूरा नेटवर्क इतने व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा था कि पहली नजर में कोई भी इसे वैध बीज उत्पादन इकाई समझ सकता था। हाईटेक मशीनें, ऑटोमैटिक पैकिंग यूनिट और बड़े-बड़े स्टॉक इस बात का संकेत दे रहे थे कि किसानों को ठगने का यह धंधा छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि करोड़ों के कारोबार के रूप में चल रहा था।

कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मौके पर जांच के दौरान कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत बीजों के नाम का गलत इस्तेमाल कर किसानों को भ्रमित किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि साधारण मूंगफली को प्रोसेस कर RG-510 जैसे रिसर्च बीज के नाम से बाजार में उतारा जा रहा था। यह बीज किसानों को अधिक उत्पादन का दावा कर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था।

मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ नकली बीज बेचने का मामला नहीं है, बल्कि किसानों के सपनों और उनकी मेहनत पर हमला है। ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

प्रारंभिक जांच में मूंगफली बीज में गंभीर गड़बड़ियों के साथ अल्फाटॉक्सिन फंगस संक्रमण की आशंका भी सामने आई है। यदि यह पुष्टि होती है तो यह मामला केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की फसल और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा माना जाएगा।

कृषि विभाग की टीम ने मौके से बीज और मूंगफली के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित फर्मों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

जांच में यह भी सामने आया कि कई इकाइयों ने कृषि विभाग से आवश्यक अनुमति तक नहीं ली थी। मंत्री ने साफ कहा कि ये फर्में अवैध रूप से संचालन कर रही थीं। कार्रवाई के दौरान संबंधित प्लांट को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अधिकारियों को लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, सप्लाई चैन और वितरण नेटवर्क की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।

यह कार्रवाई केवल जयपुर जिले तक सीमित नहीं रही। कृषि विभाग ने प्रदेशभर में चल रहे विशेष अभियान के तहत जोधपुर, बीकानेर, सीकर और चूरू सहित कई जिलों में एक साथ दबिश दी।

विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि यह नकली बीज नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला हुआ था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि करोड़ों रुपए का यह कारोबार आखिर इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा? किसानों के नाम पर नकली बीजों का यह नेटवर्क किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था? प्रदेशभर में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद बीज कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित