संघ की शताब्दी यात्रा संगठन—समर्पण और राष्ट्र निर्माण की साधना की यात्रा : डॉ. रमेश अग्रवाल

 






जयपुर, 06 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजस्थान क्षेत्र के कार्यकर्ता विकास वर्ग प्रथम (सामान्य) समारोह का आयोजन शनिवार को सूरज मैदान आदर्श नगर जयपुर में हुआ। इस समारोह के मुख्य अतिथि सरदार राजन सिंह, प्रधान, गुरुद्वारा साहिब, जवाहर नगर, टीला नं. 5, जयपुर रहे तथा कार्यक्रम का उद्बोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने किया।

समारोह में राजस्थान क्षेत्र के विभिन्न जिलों एवं स्थानों से आए शिक्षार्थियों ने शारीरिक प्रशिक्षण, सामूहिक कार्यक्रमों एवं विविध कौशलों का प्रभावी प्रदर्शन किया। वर्ग में 231 स्थानों से 277 शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। इनमें 97 कर्मचारी, 57 व्यवसायी, 8 किसान एवं श्रमिक तथा 115 महाविद्यालय एवं तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी सम्मिलित रहे।

वर्ग के संचालन में 40 शिक्षक, 37 प्रबन्धक, 21 विभाग प्रमुख तथा 3 प्रान्त प्रमुखों ने दायित्व निभाया। बीस दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षार्थियों ने प्रातः 4 बजे से रात्रि 10:15 बजे तक अनुशासित दिनचर्या का पालन करते हुए शारीरिक, बौद्धिक एवं संगठनात्मक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

वर्ग के दौरान योग, व्यायाम, खेल, दण्ड-प्रशिक्षण एवं विविध शारीरिक गतिविधियों के साथ-साथ राष्ट्र, समाज, संस्कृति एवं समसामयिक विषयों पर बौद्धिक सत्रों का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए श्रम साधना, स्वच्छता, वृक्ष संरक्षण, जल संरक्षण तथा जैविक खाद निर्माण जैसे कार्य भी सम्पन्न किए गए।

मुख्य अतिथि सरदार राजन सिंह ने वर्ग के शिक्षार्थियों द्वारा प्रस्तुत शारीरिक प्रदर्शन एवं अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्वयंसेवकों की सामूहिकता, राष्ट्रभक्ति एवं समर्पण को देखकर भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनका विश्वास और दृढ़ हुआ है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों को निकट से देखने और अनुभव करने के पश्चात संघ के प्रति उनके मन में सम्मान और बढ़ा है। उन्होंने समाज के लोगों से आग्रह किया कि किसी भी संगठन के बारे में मत बनाने से पूर्व उसके कार्यों को स्वयं देखकर और समझकर ही राय बनानी चाहिए।

सामाजिक समरसता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का उल्लेख किया तथा कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र एकता, सेवा, परिश्रम और परस्पर सहयोग है। उन्होंने गुरु गोविन्द सिंह, महाराणा प्रताप एवं अन्य महापुरुषों के त्याग और बलिदान का स्मरण करते हुए युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा संगठन, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की सतत साधना की यात्रा है।

उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना ऐसे समय में हुई थी जब समाज में देश के प्रति निराशा का वातावरण था, किंतु डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रजीवन के पुनर्निर्माण के लिए दैनन्दिन शाखा की कार्यपद्धति के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण से राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि संघ की दैनन्दिन शाखा स्वयंसेवकों में अनुशासन, संगठन क्षमता, नेतृत्व, सेवा, बंधुता और राष्ट्रभक्ति जैसे असाधारण गुणों का विकास करती है। प्रारम्भ में उपेक्षा और विरोध का सामना करने वाला संघ आज समाज के व्यापक सहयोग और स्वीकार्यता का केंद्र बन चुका है तथा बड़ी संख्या में युवा स्वयं प्रेरणा से संघ के साथ जुड़ना चाहते हैं।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संघ ने विभाजन काल में विस्थापितों की सेवा, गौसंरक्षण आंदोलन, श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन, श्रीराम मंदिर निर्माण, रामसेतु संरक्षण, कोरोना कालीन सेवा कार्यों सहित अनेक राष्ट्रीय अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, इतिहास, परम्पराएं और राष्ट्रीय चेतना मूलतः एकात्म हैं। इसी आधार पर डॉ. हेडगेवार ने भारत को एक राष्ट्र के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि संघ प्रेरणा से आज 36 से अधिक संगठन समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में राष्ट्र निर्माण के कार्य में सक्रिय हैं। स्वाभिमान, सांस्कृतिक जागरण और सनातन परम्परा के प्रति बढ़ते सम्मान के कारण भारत आज विकास के विभिन्न मानकों पर विश्व में अग्रणी भूमिका की ओर बढ़ रहा है।

समापन समारोह में संघ के क्षेत्रीय एवं प्रान्तीय अधिकारी, गणमान्य नागरिक, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश