दुश्मन को घर में घुसकर मारता है आज का भारत : मुख्यमंत्री
जयपुर, 25 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कारगिल की विजय भारत के गौरव, पराक्रम, शौर्य और अदम्य राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। इस युद्ध में भारत के जांबाज सैनिकों ने असंभव को संभव कर दिखाया। टाइगर हिल से लेकर टोलोलिंग तक, बटालिक से लेकर द्रास तक, हर चोटी पर हमारे तिरंगे को फिर से लहराया।
मुख्यमंत्री शनिवार को बिड़ला सभागार में कारगिल विजय दिवस शौर्य संध्या कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में जब पाकिस्तान ने हमारे देश के खिलाफ साजिश रची, तब भारतीय सेना ने उसे सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया। हमारे जांबाजों ने यह लड़ाई 15 से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 85 दिनों तक लड़ी। कारगिल का युद्ध अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन व दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण चुनौतीपूर्ण था।
उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमारे वीर जवानों के जोश में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय देकर दुश्मन के कब्जे से हमारे क्षेत्रों को मुक्त कराया। इस दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया जैसे वीर नायकों ने अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध में भारत के 527 वीर सपूत शहीद हुए तथा 1300 से अधिक घायल हुए। इनमें स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा, कैप्टन अमित भारद्वाज समेत राजस्थान से कुल 58 वीर सपूत शहीद हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीरों ने यह सिद्ध किया कि जिस देश की सेना का मनोबल हिमालय से भी ऊंचा हो, उस देश को कोई झुका नहीं सकता। ऑपरेशन विजय केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, वो सभी भारतीयों के स्वाभिमान की विजय थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। पिछले वर्षों में भारत ने अपनी सुरक्षा नीति को नई शक्ति, नई स्पष्टता और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाया है। हमारी सेनाएं आधुनिक तकनीक से सुसज्जित हो रही हैं। केन्द्र सरकार ने सेनाओं को मजबूत बनाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है। आज दुनिया भारत की सैन्य क्षमता, सामरिक सोच और निर्णायक नेतृत्व का सम्मान करती है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर भारत को मंत्र बनाया है। इसी के तहत तेजस जैसे लडाकू विमान और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों में स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर शहीदों के बलिदान से युवाओं को परिचित कराने के लिए राष्ट्रीय समर स्मारक बनाया गया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज का भारत दुश्मन की जड़ों पर प्रहार करता है और दुश्मन को घर में घुसकर मारता है। हम सभी ने इसे 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में अच्छे से देखा है। भारतीय सेना ने मिसाइलों और बमों के जरिए ऑपरेशन सिंदूर में सीमा पार किए बिना मिनटों में आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया।
उन्होंने कहा कि सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। इसलिए डबल इंजन सरकार ने पूर्व सैनिकों एवं वीर नारियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सैनिक कल्याण विभाग को सशक्त बनाया है। युद्ध के बलिदानी योद्धाओं के आश्रितों और शौर्य पदक धारकों को 25-25 बीघा भूमि आवंटित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानी योद्धाओं के 154 आश्रितों और परिवारजनों को सरकारी नौकरी दी है। इसी तरह अन्य वीर सैनिकों के 47 आश्रितों का राजकीय सेवा में नियोजन किया गया है। पूर्व सैनिकों की पेंशन संबंधी विसंगतियां दूर करने के लिए जिला स्तर पर 418 कैम्पों का आयोजन कर 1 हजार 228 प्रकरणों का निस्तारण किया गया है। रेक्सको के माध्यम से पूर्व सैनिकों को भी फिर से नियोजन के अवसर प्रदान किये जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न विभागों में रेक्सको के माध्यम से कार्यरत भूतपूर्व सैनिकों के मानदेय में वर्ष 2024 एवं वर्ष 2025 में 10-10 प्रतिशत की वृद्धि की है। तीन नए जिलों ब्यावर, खैरथल-तिजारा और फलोदी में जिला सैनिक कल्याण कार्यालय स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि सैनिक समुदाय को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से 18 जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण क्लिनिक स्थापित किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 78वें सेना दिवस परेड का ऐतिहासिक आयोजन राजधानी जयपुर में किया गया। इस अवसर पर भारतीय सेना ने अपने अद्भुत साहस, शौर्य और आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया। ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल, आधुनिक टैंकों और अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों ने आत्मनिर्भर भारत की रक्षा शक्ति का परिचय कराया।
उन्होंने कहा कि सेना दिवस परेड भारतीय सेना के पराक्रम, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति अटूट संकल्प का प्रेरक संदेश थी।
उन्होंने कहा कि कारगिल केवल इतिहास की घटना नहीं है यह राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की जीवंत पाठशाला है। हमारा प्रयास है कि सेना के शौर्य और पराक्रम की ऐसी महान गाथाएं जन जन तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से भारतीय सेना की वॉर ट्रॉफीज को प्रमुख स्कूल, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्थापित किया जा रहा है। इन्हें वहां प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि युवा भारतीय सेना के अद्वितीय शौर्य, बलिदान और गौरवशाली परम्पराओं से प्रेरणा ले सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों का सम्मान प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय कर्तव्य है। जब समाज अपने सैनिकों के साथ खड़ा होता है, तभी राष्ट्र और अधिक सशक्त बनता है। उन्होंने शहीदों के बलिदान को सदैव याद रखने, सैनिकों का सम्मान करने, वीर नारियों के स्वाभिमान की रक्षा करने और भारत की एकता, अखण्डता एवं संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संकल्प दिलाया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कारगिल युद्ध के शहीदों के परिजन एवं वीर नारियों तथा सेवारत सैन्य अधिकारी एवं पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया।
इस दौरान उन्होंने पूर्व सैनिकों को रेक्सको के माध्यम से नियोजन पत्र प्रदान किए।
सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि कारगिल युद्ध केवल सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारत के व्यक्तित्व की विजय थी। इस युद्ध से नागरिक भी जुड़े और भारतीय सेना की सेवा के लिए खडे़ रहे। कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे नौजवानों ने अपनी शहादत देकर देश को सुरक्षित रखा। उन्होंने कहा कि नाम, नमक व निशान से सैनिकों में देश सेवा का जज्बा मजबूत बनता है।
कारगिल विजय दिवस शौर्य संध्या कार्यक्रम में कारगिल युद्ध और शहीदों पर कविता पाठ किया गया। वहीं, भारतीय सेना के बैण्ड ने मधुर धुनों की प्रस्तुति से कार्यक्रम को राष्ट्र भक्ति की भावना से भर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, सप्त शक्ति कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा, सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर, चीफ ऑफ स्टाफ मुख्यालय सप्त शक्ति कमान लेफ्टिनेंट जनरल पदम सिंह शेखावत, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल माधवेन्द्र सिंह सहित वीर शहीदों के परिजन, वीर नारियां, सैन्य अधिकारी तथा बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित