अहमदाबाद हादसे में मृत डूंगरपुर के श्रमिक के आश्रितों को मिला न्याय: मुआवजे पर सहमति
डूंगरपुर, 06 जुलाई (हि.स.)। जिले के हिराता लोलकपुर निवासी एक आदिवासी श्रमिक की अहमदाबाद में काम के दौरान हुई मौत के मामले में आखिरकार पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिल गया है। हादसे के बाद मुआवजा देने से मुकरने वाले नियोक्ता को आदिवासी विकास यूनियन संगठन (अहमदाबाद) के कड़े रुख और त्रिपक्षीय वार्ता के दबाव के आगे झुकना पड़ा। संगठन के तीन दिनों के अथक प्रयासों के बाद पीड़ित परिवार के लिए 4,25,000 रुपये की सम्मानजनक मुआवजा राशि स्वीकृत कराई गई है, जिससे पीड़ित परिवार को तात्कालिक आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, डूंगरपुर जिले के हिराता लोलकपुर निवासी कमलेश मईडा पुत्र गटूलाल मईडा आजीविका की तलाश में अहमदाबाद गए हुए थे। वहां वे एक बंगले पर घर घाटी का कार्य कर रहे थे। गत दिनों जब वे नियोक्ता के पालतू कुत्ते को टहलाने के लिए बंगले के परिसर में निकले थे, तभी पास में स्थित नारियल के पेड़ से एक भारी नारियल अचानक उनके सिर पर आ गिरा। नारियल की भीषण चोट से कमलेश मौके पर ही लहूलुहान होकर बेहोश हो गए।
उन्हें तत्काल अहमदाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे लगभग 10 दिनों तक जीवन और मौत के बीच जूझते रहे। 1 जुलाई को उपचार के दौरान कमलेश ने दम तोड़ दिया। कमलेश की असामयिक मृत्यु से उनके पीछे उनकी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो गया।
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कमलेश की मौत के बाद शुरुआत में नियोक्ता ने संवेदनहीनता दिखाते हुए परिजनों को महज 2 लाख रुपये देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। चूंकि मृतक अपने परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था, इसलिए पीछे छूटे दो मासूम बच्चों और पत्नी के भरण-पोषण को देखते हुए परिजनों ने इस नाममात्र की राशि को नाकाफी बताते हुए उचित मुआवजे की मांग की, जिसे नियोक्ता ने सिरे से खारिज कर दिया।
नियोक्ता के अड़ियल रवैये से परेशान होकर निराश परिजनों ने इसकी सूचना आदिवासी विकास यूनियन संगठन को दी। सूचना मिलते ही संगठन की टीम तुरंत अहमदाबाद घटना स्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। संगठन ने स्थानीय प्रशासन और नियोक्ता पर दबाव बनाते हुए स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवार को उचित न्याय और सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिलता, वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।
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संगठन के पदाधिकारियों और नियोक्ता के बीच लगातार तीन दिनों तक गहन दौर की वार्ता चली। रविवार देर शाम को आखिरकार संगठन की एकजुटता और न्यायसंगत रुख के सामने सेठ को झुकना पड़ा और कुल 4.25 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनी। इसमें से 1,25,000 नकद राशि तुरंत प्रदान की गई तथा 3,00,000 का बैंक चेक मृतक की पत्नी एवं माता के नाम पर जारी किया गया। इस सराहनीय और त्वरित न्याय दिलाने के कार्य के लिए मृतक के परिजनों सहित पूरे समाज ने संगठन की टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है। उक्त जानकारी संगठन के मीडिया प्रभारी विजयपाल मेणात ने दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष