रंगपंचमी मनाई, मंदिरों में होरिया उत्सव का समापन, पांड्या नृत्य ने मचाई धूम
जोधपुर, 08 मार्च (हि.स.)। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रविवार को रंगपंचमी के रूप में मनाई गई। इसके साथ ही पिछले एक माह से शहर में चल रहे होरिया गायन और फूलों की होली का समापन हो गया। मंदिरों में भगवान को अंतिम दिन केसर से होली खिलाई गई और शाम को उत्सव मनाया।
जूनी मंडी स्थित गंगश्यामजी मंदिर में रविवार को सुबह भक्तों ने ठाकुरजी के साथ केसर से होली खेली। शाम को मंदिर परिसर में पांड्या नृत्य का आयोजन हुआ। भगवान गंगश्यामजी का भी पांड्या रूप में शृंगार किया गया। मंदिर परिसर के चौक में श्रद्धालुओं ने पांड्या बनकर भगवान को रिझाया और पांड्या नाचे हरे-हरे के जयकारों की गूंज रही। पुजारी मुरली मनोहर और पुुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि रात को पांड्या नृत्य का आयोजन हुआ। इसके साथ ही मंदिर में पिछले 40 दिनों से चल रहे होरिया गायन का समापन भी हो गया।
वहीं रणछोड़दास मंदिर में फूलों से होली खेली गई। पुजारी दिलीप शर्मा ने बताया कि मंदिर में पिछले कई सालों से शिवरात्रि से रंगपंचमी तक मंदिर में गुलाल उड़ाने की परंपरा जारी है। करीब 25 दिनों तक मंदिर में कुल 500 किलो से ज्यादा गुलाल उड़ाई जाती है और रंगपंचमी के दिन पानी और केसर से होली खेलने की परंपरा आज भी कायम है। अंतिम दिन रविवार को केसर, गुलाल और पानी की होली खेली गई।
इसी तरह भीतरी शहर के कटला बाजार स्थित कुंजबिहारी मंदिर में रंगपंचमी पर रविवार को अंतिम दिन उत्सव मनाते हुए होरिया गायन का समापन किया गया। यहां हर दिन ठाकुरजी की वृंदावन सहित अनेक तरह की झांकियां और फूल बंगला सजाते हुए शृंगार किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश