जोधपुर में बेटियों के लिए बनेगा 10 करोड़ की लागत से हॉस्टल

 


जोधपुर, 23 मार्च (हि.स.)। ग्रामीण क्षेत्रों में पढऩे वाली कई बेटियां उचित संसाधनों के अभाव में आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालयों की गांव से दूरी तथा आर्थिक तंगी भी अक्सर उनकी शिक्षा में बाधा बन जाती है। लेकिन अब बेटियों को न केवल पढ़ाई के लिए मंच मिलेगा, बल्कि जोधपुर शहर के सरदारपुरा में उनके लिए 10 करोड़ रुपये की लागत से एक आलीशान हॉस्टल भी बनाया जाएगा। मॉडर्न फैसिलिटिज से लैस इस हॉस्टल में 300 बेटियां रहकर अपनी पढ़ाई कर सकेंगी।

यह पहल राजपुरोहित समाज की ओर से की गई है। समाज के भामाशाहों की उदार सहायता से जोधपुर में 300 बेटियों की क्षमता वाला पूर्ण रूप से एयर-कंडीशंड बालिका छात्रावास तैयार किया जाएगा। यह निर्णय संत निर्मलदास महाराज के सान्निध्य में जोधपुर में आयोजित बैठक में लिया गया।

राजपुरोहित छात्रावास सरदारपुर के अध्यक्ष सुमेर सिंह कानोडिया ने बताया कि यह बेटियों के लिए पहला पूर्ण रूप से एयर-कंडीशंड छात्रावास होगा। इसका निर्माण जोधपुर शहर के अंदर ही किया जाएगा। यह पांच मंजिला भवन होगा, जिसमें 300 बेटियां एक साथ रह सकेंगी। हर बेटी को अलग-अलग कमरा मिलेगा। शनिवार को समाज के दो दर्जन से अधिक भामाशाहों ने सहयोग राशि देने की घोषणा कर दी।

इसके साथ ही 200 बेटियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु आधुनिक लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी, जिसे एक्सपर्ट महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। समाज के भामाशाहों ने निर्माण कार्य में बढ़-चढकऱ भागीदारी निभाते हुए सहयोग राशि की घोषणाएं कीं।

छात्रावास बनने के बाद पाली, जोधपुर, जालोर, सिरोही, बाड़मेर सहित आसपास के कई जिलों की बेटियों को लाभ मिलेगा। अब उन्हें उच्च शिक्षा के लिए शहरों में भटकना नहीं पड़ेगा। सुरक्षित वातावरण में रहकर पढ़ाई कर सकेंगी। छात्रावास जैसी सुविधाएं ग्रामीण बेटियों की शिक्षा में बड़ी भूमिका निभाती हैं। सुरक्षित आवास मिलने से उनकी पढ़ाई जारी रहती है और ड्रॉपआउट दर में कमी आती है।

छात्रावास विशेष रूप से उन परिवारों के लिए संजीवनी होगा, जो आर्थिक कारणों या सुरक्षा की चिंता के चलते बेटियों को बाहर पढऩे नहीं भेज पाते। छात्रावास में रहने और पढऩे की सुविधा मिलने से बेटियां आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। यह निर्णय केवल एक भवन निर्माण नहीं, बल्कि समाज की बदलती सोच का प्रतीक है। जहां पहले बेटियों की पढ़ाई सीमित थी, वहीं अब उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास हो रहे हैं। अब यह छात्रावास बेटियों के सपनों को उड़ान देगा और समाज को नई दिशा देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश