जाेधपुर में प्रसन्नचंद मेहता नए महापौर, कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी को 6 वोटों से हराया

 


- कहा- दिवाली से पहले रोशनी, सफाई और सडक़ें ठीक करवाना प्राथमिकता

जोधपुर, 25 सितम्बर (हि.स.)। जोधपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता महापौर चुने गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी को 6 वोटों से हराया। सौ पार्षदों के मतदान में भाजपा को 53 और कांग्रेस को 47 मत प्राप्त हुए हैं। भाजपा के पास 45 अपने और 7 निर्दलीयों का समर्थन था, लेकिन मतदान के दौरान उन्हें एक मत अतिरिक्त मिला है। कांग्रेस के पास 44 पार्षद और तीन उनके समर्थित निर्दलीय थे।

कांग्रेस को इस चुनाव में भाजपा की तरह बहुमत नहीं मिला था। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कहने पर कांग्रेस ने जोधपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सोलंकी को हाइब्रिड फॉर्मूले के तहत महापौर का प्रत्याशी बनाया था। सोलंकी माली समाज से आते हैं। भाजपा और उसके समर्थित 6 पार्षद माली हैं। उम्मीद थी कि समाज के पार्षदों का समर्थन मिलेगा, लेकिन कांग्रेस का यह दांव नहीं चला। भाजपा अपने 45 और 7 निर्दलीय को एक साथ रखने में कामयाब हुई। साथ ही एक पार्षद का अतिरिक्त समर्थन भी प्राप्त करने में सफलता हासिल कर ली। जीत के बाद समर्थक कंधे पर बैठाकर उन्हें निगम परिसर से बाहर लेकर आए। मेहता का परिवार भी निगम पहुंचा। उनकी बेटियां दौड़ते हुए पिता के पास पहुंची और गले लगा लिया।

महापौर चुने जाने के बाद प्रसन्नचंद मेहता ने कहा कि अब वे पूरे शहर के महापौर हैं। सभी पार्षद उनके अपने हैं। पहली प्राथमिकता दिवाली से पहले शहर में रोशनी, सफाई और सडक़ें ठीक करवाने की होगी। उन्होंने इसके लिए पार्टी के मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व को भी धन्यवाद दिया। उपमहापौर के चुनाव पर कहा कि जो पार्टी निर्देश देगी उसके अनुरूप चयन किया जाएगा। वहीं भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि चुनाव के पहले दिन से तय था कि महापौर भाजपा का बनेगा। आज इस सफलता पर वे पूरे शहर को धन्यवाद देते हैं। उपमहापौर के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी के निर्देश पर कार्यकर्ता को इसके लिए मौका दिया जाएगा।

महापौर के लिए वोटिंग के दौरान मतपत्रों की गोपनीयता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने मतदान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मतपत्रों पर जानबूझकर क्रमांक (सीरियल नंबर) डाले गए हैं। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और पार्षद नरेश जोशी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब किसी पार्षद को जारी किए गए मतपत्र पर क्रमांक अंकित किया गया हो। इस प्रक्रिया से मतदान की गोपनीयता पूरी तरह खत्म हो गई है, क्योंकि अब आसानी से यह पता लगाया जा सकता है कि किस पार्षद ने किसे वोट दिया है। जोशी ने इसे सरकार की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बताते हुए कहा कि इस मामले को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सामने रखा जाएगा और आगे की कानूनी या राजनीतिक रणनीति तय की जाएगी। जोशी ने कहा कि हम इसको लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में बात कर आगे निर्णय लेंगे। जोधपुर महापौर चुनाव में क्रॉस वोटिंग की सबसे ज्यादा संभावनाएं थीं। ऐसे में मतपत्रों पर क्रमांक लगाने की इस व्यवस्था को पार्षदों पर दबाव बनाने और उनके वोट की पहचान करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस विवाद का सीधा असर कल होने वाले उपमहापौर के चुनाव पर भी पड़ेगा। महापौर पद के मतदान के दौरान अंतिम मत भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता ने दिया। कांग्रेस से प्रत्याशी राजेंद्र सिंह सोलंकी स्वयं पार्षद नहीं है ऐसे में उन्होंने वोट नहीं डाला।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश