..आओ म्हारा हंसराज, आओ म्हारा बच्छराज
श्रद्धापूर्वक मनाया लोकपर्व बछ बारस, गाय-बछड़े की पूजा कर मांगी परिवार की खुशहाली
जोधपुर, 08 सितम्बर (हि.स.)। मां और बेटे के बीच वात्सल्य के प्रतीक का लोकपर्व बछ बारस भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर मंगलवार को परम्परागत और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। माताओं ने बछड़े और उसकी मां का पूजन करने के साथ अपने पुत्रों के तिलक लगाकर, मौली बांधकर, लड्डू खिलाकर उनके दीर्घायु होने की कामना की। बछ बारस के दिन माताओं ने गेहूं का आटा, गाय के दूध से निर्मित व्यंजनों व चाकू से कटी सब्जियों का परित्याग किया। साथ ही बाजरे की रोटी तथा आखे धान चना, मोठ की सब्जियां खाई।
..आओ म्हारा हंसराज, आओ म्हारा बच्छराज नाडी फोड पानी पिलाओ से बुलाया और बच्चों को तिलक-मौली बांधकर आरती उतारी। साथ ही लड्डू खिलाकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बच्चों ने भी अपनी माताओं का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। बछबारस पर पुत्रों की पसंद के व्यंजन बनाए गए और उन्हें उपहार भी दिए। यह व्रत पुत्र की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना के लिए किया गया। साथ ही बछड़े वाली गौ माता का विशेष रूप से पूजन किया गया जिसमें गाय को बाजरी का सोगरा, लोया भी खिलाया और ओढना ओढ़ाकर मां-बेटे के प्यार को निरंतर जारी रखने की कामना की।
रातानाडा, शिव रोड, केसरबाग स्थित श्री सिद्ध नागेश्वर महादेव मंदिर में भाद्रपद मास की द्वादशी के पावन अवसर पर बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) का पर्व पुजारी ललिता जोशी के सान्निध्य में श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विधि-विधानपूर्वक गाय एवं बछड़े का पूजन किया गया। मंदिर पुजारी ललिता जोशी ने बछ बारस की धार्मिक मान्यताओं एवं कथा का श्रवण कराया तथा गौ-पूजन के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बछ बारस का पर्व मातृत्व, गौ-सेवा और संतान के प्रति मंगलकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। श्रद्धालुओं ने गौ-पूजन में भाग लेकर पर्व की परंपराओं का पालन किया तथा गौ-सेवा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।
लोक मान्यता है कि इस दिन बछड़े वाली गाय की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि रहती है और बेटे की लंबी उम्र होती है। परंपरा अनुसार इस दिन महिलाएं अंकुरित धान का भोजन में उपयोग करती है। साथ ही चाकू का इस्तेमाल नहीं करती। परंपरानुसार इस दिन पुत्रवती स्त्रियों ने व्रत रखा। उल्लेखनीय है कि कृष्ण जन्मोत्सव के बाद पूरे मारवाड़ में गोवत्स पूजन के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व पर गोवंश की पूजा के साथ माता अपने पुत्र की सुख-समृद्धि की मंगल कामना करती है। इस मौके पर गौशालाओं में पूजन भी किया गया। दूध देने वाली गाय को बछड़े सहित स्नान कराकर, उनको नया वस्त्र चढ़ाते हुए पुष्प अर्पित कर तिलक लगाकर विधिवत पूजा कर कथा सुनी और फिर प्रसाद ग्रहण किया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश