भीलवाड़ा में जिन्दल को 1400 बीघा जमीन देने का विरोध, संघर्ष समिति ने दी आंदोलन की चेतावनी

 






भीलवाड़ा, 16 जून (हि.स.)। भीलवाड़ा में खनन विस्तार के लिए जिन्दल सॉ लिमिटेड को 1400 बीघा अतिरिक्त भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। ओवरब्रिज बनाओ संघर्ष समिति भीलवाड़ा ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कंपनी को नई भूमि आवंटित करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कंपनी द्वारा पूर्व में किए गए जनहितकारी वादों को पूरा कराए बिना नई जमीन दी गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

संघर्ष समिति का कहना है कि जिन्दल सॉ लिमिटेड को पहले भी खनन कार्य के लिए बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। उस समय कंपनी ने क्षेत्र के विकास और जनसुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण वादे किए थे। इनमें रामधाम के पास रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण, पुर क्षेत्र के दोनों तालाबों को स्वच्छ जल से भरना तथा क्षेत्र में स्टील प्लांट स्थापित करना प्रमुख था। समिति का आरोप है कि इन वादों को लिखित समझौते और पंजीकृत अनुबंधों में भी शामिल किया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद इनमें से कोई भी वादा धरातल पर नजर नहीं आया।

जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू को सौंपे गए ज्ञापन में समिति ने कहा कि कंपनी अब अपने खनन क्षेत्र के विस्तार के लिए लगभग 1400 बीघा अतिरिक्त भूमि की मांग कर रही है और प्रशासनिक स्तर पर इस प्रस्ताव पर विचार भी शुरू हो चुका है। ऐसे में पहले यह देखा जाना चाहिए कि कंपनी ने पूर्व में जनता और प्रशासन से किए गए वादों को कितना पूरा किया है।

समिति का कहना है कि जिन परियोजनाओं का लाभ सीधे आम जनता को मिलना था, वे आज भी अधूरी पड़ी हैं। रामधाम क्षेत्र का ओवरब्रिज अभी तक केवल कागजों में सीमित है, जबकि पुर के तालाबों के पुनर्भरण और स्टील प्लांट स्थापना के वादे भी अधूरे पड़े हैं। ऐसे में कंपनी को नई भूमि देना जनभावनाओं के साथ अन्याय होगा।

संघर्ष समिति के सदस्यों लक्ष्मीनारायण डाड, दुर्गेश शर्मा, उम्मेदसिंह राठौड़, बाबूलाल जाजू, महेश सोनी, सत्यनारायण विश्नोई, ओम कसारा, अशोक मूंदड़ा, सीताराम खटीक एवं नेमचंद सिंघवी ने मांग की कि जिन्दल सॉ लिमिटेड को अतिरिक्त भूमि आवंटित करने की पूरी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। साथ ही पूर्व में कंपनी द्वारा किए गए सभी लिखित वादों और पंजीकृत समझौतों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।

समिति ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जनहित की अनदेखी करते हुए भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई तो क्षेत्र के नागरिकों और संघर्ष समिति को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे क्षेत्र में जनआक्रोश और बढ़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद