जेडीए में जेईएन के पद खाली, करोड़ों के काम पर पड़ रहा असर

 


जयपुर, 28 अगस्त (हि.स.)। जयपुर विकास प्राधिकरण में कनिष्ठ अभियंताओं (जेईएन) की भारी कमी अब निर्माण कार्यों पर असर डालने लगी है। जेडीए के कैडर स्ट्रेंथ में जेईएन के कुल 534 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में महज 36 कनिष्ठ अभियंता ही कार्यरत हैं। ऐसे में इंजीनियरिंग शाखा में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है और करोड़ों रुपये की लागत से चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की निगरानी प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।

जेडीए में कनिष्ठ अभियंता से लेकर चीफ इंजीनियर तक कुल 736 पद स्वीकृत हैं। इनमें एक्सईएन के 61 पद स्वीकृत हैं, जिनका कोटा वर्तमान में पूरा बताया जा रहा है। वहीं एईएन के 107 स्वीकृत पदों में केवल 40 अधिकारी ही कार्यरत हैं। सबसे खराब स्थिति जेईएन के पदों की है, जहां 534 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 36 पर ही कर्मचारी काम कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले जेडीए में जेईएन की संख्या करीब 53 थी। इनमें से कई कनिष्ठ अभियंताओं को पदोन्नति देकर एईएन बना दिया गया। हालांकि, पदोन्नति के बाद अभी तक कई अधिकारियों को एईएन पद पर पोस्टिंग नहीं मिल पाई है। इसके बावजूद पदोन्नति के बाद वे जेईएन के स्तर का काम करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका सीधा असर फील्ड में चल रहे विकास कार्यों पर पड़ रहा है।

डायरेक्टर इंजीनियर देवेंद्र गुप्ता का कहना है कि लम्बे समय से जेडीए में जेईएन व अन्य अधिकारियाें की भर्ती नहीं हुई है, इससे लगातार स्टाप कम हाे रहा है। सरकार काे इस ओर ध्यान देने की जरुरत है।

इंजीनियरिंग शाखा में जेईएन का पद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। निर्माण स्थल पर नियमित निगरानी, कार्य की गुणवत्ता की जांच, माप, प्लानिंग और ठेकेदारों के साथ समन्वय जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य जेईएन के जिम्मे रहते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में पद खाली होने से मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है।

जेडीए में वर्तमान में एलीवेटेड रोड, सीवरेज लाइन, ड्रेनेज, विद्युत व्यवस्था, सड़क निर्माण सहित कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इन परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए पर्याप्त संख्या में फील्ड इंजीनियरों की आवश्यकता होती है। जेईएन की कमी के चलते एक अधिकारी को कई क्षेत्रों और कार्यस्थलों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।

जेडीए की विद्युत शाखा में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां वर्तमान में एक भी जेईएन कार्यरत नहीं है। एईएन स्तर के अधिकारी ही जेईएन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं विद्युत शाखा में एक्सईएन के भी तीन पद खाली बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक दो जोनों का काम एक विद्युत एक्सईएन के पास है, जबकि शेष दो जोनों की जिम्मेदारी सिविल इंजीनियरों को सौंपी गई है। विद्युत शाखा में एईएन के स्वीकृत आठों पदों पर अधिकारी मौजूद हैं, लेकिन जेईएन का एक भी पद भरा नहीं है। पूर्व में कार्यरत जेईएन पदोन्नति पाकर एईएन बन चुके हैं।

ऐसे में जेडीए में लंबे समय से जेईएन के रिक्त पदों को भरने की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि जल्द भर्ती या पदस्थापन की प्रक्रिया नहीं की गई तो बढ़ते निर्माण कार्यों के बीच इंजीनियरिंग शाखा पर काम का दबाव और बढ़ सकता है, जिसका असर विकास परियोजनाओं की गति और निगरानी की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश