जेडीए ने वन विभाग की जमीन पर बसा दी लोहा लक्कड़ पत्थर मंडी योजना
जयपुर, 01 मई (हि.स.)। दिल्ली रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे के पास जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा काटी गई लोहा लक्कड पत्थर मंडी योजना वन विभाग की भूमि पर बसी है। मामले का खुलासा होते ही जेडीए अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। अब जेडीए के अधिकारी इस खसरे को लेकर राजस्व का रिकॉर्ड खंगालने में लगे है। साथ ही वन विभाग को भी मामले की जांच तक कार्रवाई करने से मना कर दिया है।
जेडीए जोन-10 उपायुक्त राधिका देवी ने बताया कि जेडीए ने 40 साल पहले दिल्ली रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे के पास जेडीए लोहा लक्कड पत्थर मंडी के नाम की योजना काटी थी। योजना में शामिल खसरा नम्बर 4/3 वन विभाग के नाम रिकॉर्ड में बोल रहा है। ऐसे में वन विभाग के अधिकारियों को उसके पास जमीन से सम्बधिंत जो भी रिकॉर्ड है लेकर वार्ता के लिए बुलाया है। इस खसरे का राजस्व रिकॉर्ड भी देखा जा रहा है। इस योजना के लिए जेडीए ने बाकायदा अधिसूचना जारी की थी। अब देखना यह है कि यह खसरा किस स्तर पर लापरवाही या किसी अन्य कारण से वन विभाग के नाम रिकॉर्ड में चढ़ा है। इसकी जांच की जा रही है। जांच का निष्कर्ष आने तक वन विभाग को कार्रवाई स्थगित करने को लेकर पत्र लिखा जा रहा है।
गौरतलब है कि जेडीए ने 1985 में दिल्ली रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे पास और वर्तमान में टनल के नजदीक लोहा लक्कड़ पत्थर मंडी नाम से योजना काटी थी। इस योजना में कई लोगों ने भूखंड खरीदे थे। इस योजना में जेडीए ने आमजन को व्यावसायित पट्टे जारी किए थे। इस योजना में आमजन को कुल 40 व्यावसायिक पट्टे जारी किए थे। जनवरी माह में वन विभाग ने इस योजना को अवैध मानते हुए भूखंड मालिकों को नोटिस जारी कर उनकों दस्तावेज पेश करने को कहा था। नोटिस मिलने के बाद भूखंड मालिकों में खलबली मच गई। इससे आमजन में जेडीए के प्रति आक्रोश भी व्याप्त हो गया। लोग शिकायत लेकर जेडीए अधिकारियों के पास पहुंचे तो उन्होंने जांच करवाने की बात कहीं। जेडीए ने जब मामले की जांच करवाई तो सामने आया कि इस योजना में शामिल खसरा नम्बर 3/4 वन विभाग के नाम दर्ज है। इसके बाद जेडीए ने योजना लॉच करने के दौरान के दस्तावेज खंगाले तो पूरा मामला खुलकर सामने आया है। योजना लांच करने के दौरान इन खसरों को लेकर बाकायदा अधिसूचना जारी की गई थी। बाद में यह गड़बड़ी कैसे हुई इसकी जांच जेडीए द्वारा की जा रही है। 5000 वर्गफीट जमीन पर वन विभाग ने माना अतिक्रमण वन विभाग ने आमागढ़ में 5000 वर्गफीट जमीन पर अतिक्रमण माना है।
इस पूरे मामले में पीडि़तों को नोटिस जारी कर वन विभाग ने सुनवाई का समय दिया है। प्रकरण अन्तर्गत धारा 91 भू-राजस्व अधिनिमय 1956 अवैध कब्जा वन भूमि खण्ड आमागढ़ 92 के मौजा ग्राम जामड़ोली, खसरा नम्बर 4/3 रकबा 141.47 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण मानते हुए क्षेत्रीय वन अधिकारी ने नोटिस जारी किया है। यह जमीन करीब 5000 वर्गफीट बताई जा रही है। नोटिस में उक्त मुकदमें में सुनवाई 3 फरवरी को कार्यालय सहायक वन संरक्षक नाहरगढ़ जैविक उद्यान में निश्चित की गई थी। नोटिस प्राप्तकर्ता को स्वयं मय साक्ष्य आदि अथवा अपने अभिभाषक के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित होने की बात कहीं गई थी
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश