हाईटेंशन लाइन हटने के बाद भूखंडधारियों को मिलेंगे पट्टे, जेडीए ने सरल की प्रक्रिया
जयपुर, 01 नवंबर (हि.स.)। हाईटेंशन विद्युत लाइन के कारण वर्षों से पट्टे का इंतजार कर रहे भूखंडधारियों के लिए राहत की खबर है। जिन स्वीकृत कॉलोनियों से हाईटेंशन लाइन हटाई जा चुकी है, वहां प्रभावित भूखंडों के अनुमोदन और पट्टे जारी करने की प्रक्रिया अब आसान होगी। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने ऐसे मामलों का निस्तारण सीधे जोन स्तर पर करने का निर्णय किया है। इससे भूखंडधारियों को मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और लंबित प्रकरणों का तेजी से निस्तारण हो सकेगा।
जेडीए ने 31 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह निर्णय 18 अगस्त को आयोजित भवन मानचित्र समिति की 437वीं बैठक में लिया गया था। इसके तहत जिन पूर्व अनुमोदित योजनाओं में हाईटेंशन लाइन के कॉरिडोर के कारण कुछ भूखंडों को अनुमोदन से बाहर रखा गया था, लेकिन अब मौके से लाइन हटाई या शिफ्ट की जा चुकी है, ऐसे भूखंडों को योजना में शामिल करने की प्रक्रिया जोन स्तर पर पूरी की जा सकेगी।
आदेश के अनुसार संबंधित मामलों में पहले यह जांच की जाएगी कि हाईटेंशन लाइन हटने के बाद योजना का विक्रय योग्य क्षेत्रफल निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। नियमों के अनुसार पात्र पाए जाने पर मूल मानचित्र में जोन स्तर पर संशोधन किया जा सकेगा। इसके बाद प्रभावित भूखंडों के अनुमोदन के साथ लीजडीड या संशोधित लीजडीड जारी की जा सकेगी। यह व्यवस्था उन मामलों में लागू होगी, जिनमें हाईटेंशन लाइन के साथ सड़क प्रस्तावित नहीं है।
इस फैसले से भैरव गृह निर्माण सहकारी समिति की योजना आदिनाथ नगर के भूखंडधारियों को भी राहत मिलेगी। यहां हाईटेंशन लाइन गुजरने के कारण कई भूखंडों के पट्टे लंबे समय से अटके हुए थे। अब मौके से लाइन हटाए जाने के बाद उनके अनुमोदन और पट्टे जारी करने का रास्ता साफ हुआ है। स्थानीय निवासी प्रमेश्वरी कसवा सहित अन्य लोगों ने इस निर्णय से राहत मिलने की उम्मीद जताई है। चंबल पावर हाउस, सोडाला, रामनगर विस्तार और गोविंदपुरी सहित एक दर्जन से अधिक कॉलोनियों में करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबी हाईटेंशन लाइन को भूमिगत करने का काम किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार के निर्देश पर जेडीए ने विद्युत निगम को 33 करोड़ रुपये जारी किए थे। वहीं अजमेर रोड क्षेत्र में गजसिंहपुरा और गोपालपुरा बाइपास से नारायण विहार तक करीब 1,300 मीटर लंबे हाईटेंशन लाइन सेफ्टी कॉरिडोर के दायरे में आने वाले लगभग 1,000 घरों और दुकानों को जेडीए ने धारा 72 के तहत नोटिस जारी किए थे। अब लाइन हटने या शिफ्ट होने के बाद प्रभावित भूखंडों के लंबित मामलों के निस्तारण की उम्मीद बढ़ी है।
जेडीए के इस फैसले से उन भूखंडधारियों को राहत मिलेगी, जिनकी जमीन पर पहले हाईटेंशन लाइन होने के कारण पट्टा जारी नहीं हो पा रहा था, जबकि अब मौके पर लाइन मौजूद नहीं है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश