छोटी काशी में गूंजे शंख-घंटे: पालकी में निकले ठाकुर जी को कराया सरोवर में जल विहार

 






जयपुर, 22 सितंबर (हि.स.)। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी मंगलवार को छोटी काशी में जलझूलनी एकादशी के रूप में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। शहर के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। शाम को शंख, घंटे और घडिय़ाल की मंगल ध्वनि के बीच सालिग्रामजी को पालकी में विराजमान कर डोल उत्सव निकाला गया। ठाकुरजी को विभिन्न मार्गों और कॉलोनियों में भ्रमण कराने के बाद पुन: मंदिर में विराजमान किया गया।

वहीं जयनिवास बाग स्थित ठिकाना मंदिर श्री गोविंद देवजी महाराज में ठाकुर श्रीजी को नटवर वेश धारण कराया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार ग्वाल झांकी के बाद शाम 4.45 से 5.15 बजे तक दर्शन पट मंगल रहें। इस दौरान मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी जलझूलनी एकादशी का विशेष पूजन किया । ठाकुर श्री सालिग्रामजी (नारायणजी) को खाट पर विराजमान कर मंदिर के दक्षिण-पश्चिमी चौक स्थित तुलसी मंच पर ले जाया गया। यहां पंचामृत अभिषेक, चंदन शृंगार और विशेष आरती की गई।

इसके बाद तुलसी मंच की चार परिक्रमा की गई। फिर सालिग्रामजी को खाट पर विराजमान कर मंदिर की एक परिक्रमा कराते हुए निज मंदिर में प्रवेश कराया गया और ठाकुर श्रीजी के समीप विराजमान किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के बाद दर्शन पट खोले गए और श्रद्धालु संध्या झांकी में ठाकुरजी के दर्शन कर आरती का लाभ लिया।

सुभाष चौक पानों का दरीबा स्थित श्री सरस निकुंज में शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में सुबह श्री राधा सरस बिहारी सरकार का वेदोक्त मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत अभिषेक किया गया। ऋतु पुष्पों से श्रृंगार कर सागारी सामग्री का भोग लगाया गया। शाम को जलझूलनी एकादशी के भाव से जुड़े पदों का गायन कर ठाकुरजी के लाड़ लड़ाए गए। पुरानी बस्ती स्थित श्री राधा गोपीनाथजी मंदिर में महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के सान्निध्य में अभिषेक, श्रृंगार और पदगायन हुआ। चौड़ा रास्ता स्थित राधा दामोदरजी मंदिर में महंत मलय गोस्वामी के सान्निध्य में एकादशी उत्सव मनाया गया। इसी प्रकार मदनगोपालजी, रामगंज बाजार स्थित लाड़लीजी, चांदनी चौक स्थित बृजनिधिजी, आनंद कृष्ण बिहारीजी, रामगंज चौपड़ स्थित श्री मुरली मनोहरजी सहित अन्य वैष्णव मंदिरों में भी जलझूलनी एकादशी के आयोजन हुए।

गोनेर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

गोनेर स्थित श्री लक्ष्मीजगदीशजी मंदिर में जलझूलनी एकादशी का वार्षिक मेला भरा। जयपुर सहित विभिन्न जिलों और मध्यप्रदेश से हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह से ही मंदिर में दर्शनार्थियों की कतारें लगी रहीं। शाम को मुख्य उत्सव के तहत श्री लक्ष्मीजगदीश महाराज को पालकी में विराजमान कर बैंड-बाजे के साथ जगन्नाथ सरोवर ले जाया गया। श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए साथ चले।

सरोवर पहुंचने पर भगवान को नौका में विराजमान कर जल विहार कराया गया। जल विहार यात्रा में करीब 30 झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। विभिन्न स्वरूपों की झांकियों के साथ सजे-धजे घोड़े, बैंड-बाजे और बलवंत व्यायामशाला के स्वयंसेवक करतब दिखाते हुए चल रहे थे। मंदिर महंत हनुमान प्रसाद शर्मा ने बताया कि जल विहार के बाद भगवान की पालकी मंदिर के लिए रवाना हुई। रास्ते में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने जगह-जगह आरती उतारी। श्रद्धालुओं ने पालकी के नीचे से निकलने की परंपरा भी निभाई।

मेले में जयपुर के अलावा दौसा, उदयपुर, अजमेर, सुजानगढ़, कुचामन सिटी, बांदीकुई, चाकसू, लालसोट, जमवारामगढ़, बस्सी, फागी, चौमूं और बगरू सहित मध्यप्रदेश के इंदौर, रतलाम और खलघाट से भी श्रद्धालु पहुंचे।

162 साल पुरानी पालकी में निकली शोभायात्रा

खातीपुरा स्थित प्राचीन नृसिंह मंदिर में भी जलझूलनी एकादशी महोत्सव श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया। लक्ष्मी-शालिग्रामजी की शोभायात्रा हाथी, घोड़े, पालकी और बैंड-बाजे के साथ निकली। विभिन्न मार्गों से होते हुए शोभायात्रा झारखंड महादेव मंदिर पहुंची। यहां लक्ष्मी-शालिग्रामजी को पानी से स्नान कराया गया और संध्या आरती हुई। इसके बाद शोभायात्रा वापस नृसिंह मंदिर पहुंची। मंदिर पहुंचने के बाद देर रात तक भजन, कीर्तन और नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। मंच संचालन नृत्य गुरु रूपसिंह शेखावत ने किया।

शोभायात्रा में 162 साल पुरानी करीब 50 किलो वजनी पालकी विशेष आकर्षण रही। चीड़ और चंदन की लकड़ी से बनी इस पालकी को चार श्रद्धालुओं ने उठाया। पालकी को आकर्षक ढंग से सजाकर ठाकुरजी को नूतन वस्त्र धारण कराए गए। ठाकुरजी को विराजमान करने से पहले पालकी में चांदी का सिंहासन लगाया गया और उस पर सोने के सात छत्र सजाए गए। महंत मदनगोपाल दाधीच ने बताया कि जलझूलनी एकादशी पर शोभायात्रा निकालने की परंपरा 162 साल पहले शुरू हुई थी।

दुर्गापुरा में राधामोहनजी-सीतारामजी की डोल यात्रा

दुर्गापुरा स्थित राधामोहनजी मंदिर से राधामोहनजी एवं सीतारामजी की डोल यात्रा भी निकाली गई। महंत जगदीश शर्मा ने बताया कि डोल यात्रा शाम 6 बजे मंदिर से रवाना हुई। बैंड-बाजों के साथ निकली यात्रा में सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा दुर्गापुरा के मुख्य बाजार से होते हुए दुर्गा विहार, राजपूतों का मोहल्ला और ग्रीन नगर पहुंची। इसके बाद टंकी वाले शिव हनुमान मंदिर के मेला स्थल पहुंची, जहां धार्मिक आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश