नवरात्र को लेकर छोटी काशी सजने लगी: बंगाल के कारीगर दे रहे मां दुर्गा को अंतिम रूप
जयपुर, 04 अक्टूबर (हि.स.)। छोटी काशी में शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में पूजा समितियां पंडाल तैयार करने में जुटी हैं, वहीं बंगाल से आए मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में दिन-रात जुटे हुए हैं। बनीपार्क, मालवीय नगर, सी-स्कीम सहित कई इलाकों में नवरात्र उत्सव की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं।
मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमाओं की बारीक कारीगरी पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उनके अनुसार प्रतिमा तैयार करने की प्रक्रिया में मिट्टी तैयार करने से लेकर ढांचा बनाने, आकार देने, सुखाने और रंग-रोगन तक कई चरण होते हैं। प्रतिमाओं को आकर्षक स्वरूप देने के लिए अंतिम चरण में चेहरे की भाव-भंगिमा और आभूषणों की बारीकियों पर विशेष काम किया जा रहा है।
पूजा समितियों की ओर से पंडालों के निर्माण के लिए बांस, बल्ली और कपड़े सहित अन्य सामग्री जुटाई जा रही है। पंडालों को आकर्षक बनाने के लिए बिजली की रंग-बिरंगी झालरों और सजावटी रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। नौ दिनों तक यहां मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ विशेष धार्मिक आयोजन होंगे।
नवरात्र को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। पूजा सामग्री, फल-फूल, प्रसाद और सजावट के सामान की दुकानें सजने लगी हैं। श्रद्धालु घरों में भी माता के स्वागत और पूजा की तैयारियों में जुट गए हैं।
पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से प्रारंभ होंगे और 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस बार पहला नवरात्र रविवार को होने के कारण देवी का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हाथी को समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। वहीं मंगलवार को नवरात्र के समापन के कारण देवी की विदाई मुर्गे यानी कुक्कुट वाहन पर होगी।
ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के समापन या माता के प्रस्थान का दिन मंगलवार अथवा शनिवार होने पर देवी का वाहन चरणायुध यानी मुर्गा माना जाता है। शास्त्रीय मान्यताओं में मुर्गे पर माता की विदाई को शुभ नहीं माना गया है। इसे समाज में व्याकुलता, उथल-पुथल, शोक और कष्ट बढ़ने का संकेत माना जाता है। हालांकि, धार्मिक मान्यता है कि सच्ची भक्ति, श्रद्धा और आराधना से इन नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
नवरात्र के नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना, व्रत और उपवास करते हैं। विभिन्न पूजा-अनुष्ठान, हवन, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। घरों में विशेष सजावट कर माता का स्वागत किया जाता है। विजयादशमी के दिन भी श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना कर माता से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करेंगे।
शारदीय नवरात्र धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का भी पर्व है। पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होकर माता की आराधना करेंगे और उत्सव का आनंद लेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश