14 जनवरी 2027  से सजेगा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल: जुटेंगे साहित्य के दिग्गज

 




जयपुर, 01 सितंबर (हि.स.)। दुनिया के प्रमुख साहित्यिक उत्सवों में शामिल जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) अपने 20वें संस्करण के साथ साहित्य, विचार और संवाद के दो दशक पूरे करने जा रहा है। राजस्थान सरकार के सहयोग से फेस्टिवल का 20 वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर में आयोजित होगा। इस बार की थीम ‘20 ईयर्स ऑफ आइडियाज, स्टोरीज, कन्वर्सेशंस रखी गई है।

वर्ष 2008 में शुरुआत के बाद से फेस्टिवल में अब तक 8 हजार से अधिक लेखक, वक्ता और कलाकार शामिल हो चुके हैं। वहीं जमीनी स्तर पर 50 लाख से अधिक दर्शक इससे जुड़ चुके हैं। डिजिटल मंचों, प्रसारण साझेदारियों और मीडिया नेटवर्क के जरिए फेस्टिवल की पहुंच एक अरब से अधिक दर्शकों तक पहुंची है।

दो दशकों में जेएलएफ साहित्य से आगे बढ़कर इतिहास, राजनीति, विज्ञान, दर्शन, कला, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, पर्यावरण और समकालीन संस्कृति जैसे विषयों पर संवाद का अंतरराष्ट्रीय मंच बन गया है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य-पूर्व, मालदीव और आयरलैंड सहित विभिन्न देशों में इसके 15 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संस्करण आयोजित हो चुके हैं। फेस्टिवल की संस्कृति से प्रेरणा लेकर भारत और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में 300 से अधिक साहित्यिक आयोजन और महोत्सव भी सामने आए हैं। इस दौरान नोबेल पुरस्कार विजेताओं, बुकर पुरस्कार विजेताओं, राष्ट्राध्यक्षों, अर्थशास्त्रियों, दार्शनिकों, कलाकारों और दुनिया के प्रमुख विचारकों ने फेस्टिवल में शिरकत की है।

20वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय भाषाओं और बहुभाषी साहित्य को विशेष महत्व दिया जा रहा है। फेस्टिवल की घोषणा देश की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में एक साथ जारी की गई है। ‘भाषा स्वर्माला’ श्रृंखला के जरिए भारतीय भाषाओं, साहित्य और अनुवाद को विशेष मंच देने की तैयारी है।

फेस्टिवल की सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी साहित्यिक विरासत और भाषाई विविधता में बसती है। 20वें वर्ष में ‘भाषा स्वर्माला’ के माध्यम से देश की विभिन्न भाषाओं को सम्मान दिया जाएगा।

टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक एवं फेस्टिवल निर्माता संजय के. रॉय ने कहा कि पुस्तकों और विचारों में लोगों को जोड़ने की शक्ति है। लेखकों, पाठकों और संवाद के प्रति प्रतिबद्धता ने फेस्टिवल को दो दशक तक मजबूती दी है।

टीमवर्क आर्ट्स की अध्यक्ष प्रीता सिंह ने कहा कि फेस्टिवल की सफलता लेखकों, दर्शकों, सहयोगी संस्थाओं और प्रायोजकों के साझा प्रयास का परिणाम है। आने वाले वर्षों में नए दर्शकों तक पहुंच बढ़ाने और साहित्य एवं विचारों के प्रभाव को और व्यापक बनाने पर जोर रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश