चार जेडीसी बदले, सड़कों का टारगेट 'मिसिंग' लिंक

 


जयपुर, 19 जनवरी (हि.स.)। शहर की सबसे बड़ी समस्या यातायात जाम है। इससे आमजन को बचाने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण

ने मिसिंग लिंक को जोडऩे का टारगेट निर्धारित किया था, लेकिन लम्बा समय गुजर जाने के बाद भी सड़कों का टारगेट मिसिंग है। मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट की शुरूआत से लेकर अब तक चार आयुक्त बदले जा चुके है, लेकिन कोई भी आयुक्त आमजन को राहत नहीं दे पाया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व जेडीसी रवि जैन ने जनवरी 2023 में ऐसी सड़कों के लिए सभी जोनों के उपायुक्तों को उनके क्षेत्र की पांच प्रमुख सड़कों को चिह्नित कर उनके विवादों का निपटारा करवाने का जिम्मा दिया था। इसके लिए सभी को एक माह का समय दिया था। इसके बाद बाकी काम जोन एक्सईएन को करना था। अगर इस सड़कों को पूरा कर लिया जाता है तो मुख्य सड़कों का यातायात भार कम हो जाएगा। साथ ही ईंधन की बचत होगी। इसके बाद आईएएस अधिकारी जोगाराम, मंजू राजपाल और आनंदी जेडीसी बने, लेकिन किसी के भी कार्यकाल में मिसिंग लिंक का काम आगे नहीं बढ़ पाया।

पूर्व जेडीसी आनंदी ने सेक्टरों सड़कों का काम अभियान के रुप में शुरू किया था लेकिन इस अभियान की भी अब हवा निकल चुकी है। शहर भर में करीब 50 से अधिक सड़कें ऐसी जो की किसी न किसी व्यवधान के चलते बंद पड़ी है, जबकि बाकी दोनों तरफ से सड़कें पूरी बनी है। लेकिन किसी मकान, दुकान या जमीन के विवाद के चलते सड़क का बीच का हिस्सा बन नहीं पाया और यातायात बंद पड़ा है। इसके चलते कुछ सड़कों का उपयोग नहीं हो पा रहा तो कुछ में वाहन चालकों को कई किमी का चक्कर काटकर अपने गतव्यं तक जाना पड़ रहा है।

इस संबंध में जेडीसी सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि जेडीए यातायात जाम से आमजन काे बचाने के लिए मिसिंग लिंक और सेक्टर सड़काें पर काम कर रहा है।

विशेष बात यह है कि शहर की सड़कों पर दिनों दिन वाहनों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है और सड़कें सिकुडती जा रही है। सिकुडती सड़कों में जान फूंकने के लिए जेडीसी आनंदी ने सेक्टरों को पूरा करने को लेकर अभियान शुरू किया था ताकि अन्य सड़कों से यातायात का भार कम किया जा सके, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी सेक्टरों सड़कों का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है। सड़कों के काम को एआरसी के तहत करवाने के लिए टेंडर करने की अनुमति दी जा चुकी है, लेकिन जोन उपायुक्त सड़कों के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं कर पा रहे है। जेडीसी के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में जोन उपायुक्त रुचि नहीं दिखा रहे है। इसके चलते कई सड़कों का काम शुरू होकर बीच में ही बंद हो गया जिनके वापस से शुरू होने की उम्मीद भी काफी कम नजर आ रही है। इससे सेक्टर सड़कों पर अब तक खर्च किया गया पैसा व्यर्थ जा सकता है। जेडीए में वर्तमान में 27 जोन बंटा हुआ हैं। इनमें पीआरएन के 4 जोन शामिल हैं। हालांकि जब मिसिंग लिंक का टारगेट दिया गया था तब जेडीसी में 18 ही जोन बने हुए थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश