एम्स जोधपुर में आईवीएफ और सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल से पहली बार शिशु का जन्म
जाेधपुर, 04 नवंबर (हि.स.)। एम्स जोधपुर में जन्मजात अवरोधक एज़ूस्पर्मिया से पीड़ित पुरुष के उपचार में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल तकनीक के जरिए पहली बार सफलतापूर्वक शिशु का जन्म हुआ है। इस उपलब्धि से पुरुष बांझपन की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के लिए संतान प्राप्ति की नई उम्मीद जगी है। जन्म के बाद माता और शिशु दोनों स्वस्थ हैं।
इस उपचार में शल्य चिकित्सा के माध्यम से प्राप्त शुक्राणुओं का उपयोग आईवीएफ और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) तकनीक में किया गया। इसमें एक शुक्राणु को सीधे अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया गया, जिससे सफल गर्भावस्था के बाद शिशु का जन्म हुआ।
एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. डी.एन. शर्मा ने इस उपलब्धि पर उपचार टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता विशेषज्ञों की प्रतिबद्धता और समन्वित प्रयासों का परिणाम है। संस्थान बांझपन से जूझ रहे दंपतियों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाण-आधारित प्रजनन उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
इस उपचार को प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मनु गोयल, यूरोलॉजी विभाग के सह-प्रोफेसर डॉ. दीपक भिरुड तथा भ्रूणविज्ञानी डॉ. गिरीश की टीम ने विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंह के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया।
डॉ. मनु गोयल ने बताया कि अवरोधक एज़ूस्पर्मिया में पुरुष के अंडकोष में शुक्राणु बनते हैं, लेकिन प्रजनन मार्ग में अवरोध के कारण वे वीर्य तक नहीं पहुंच पाते। कुछ मामलों में यह समस्या जन्मजात होती है। ऐसी स्थिति में शल्य चिकित्सा से शुक्राणु प्राप्त कर आईवीएफ-आईसीएसआई तकनीक के जरिए संतान प्राप्ति संभव हो सकती है।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि बांझपन की समस्या पुरुष या महिला, किसी एक अथवा दोनों में हो सकती है। इसलिए उचित उपचार के लिए दोनों साथियों की समय पर और समग्र जांच जरूरी है। प्रजनन चिकित्सा में हुई प्रगति से ऐसे दंपतियों को उपचार के नए विकल्प मिल रहे हैं।
एम्स के यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर ए.एस. संधू और डॉ. दीपक भिरुड पुरुष बांझपन के उपचार से जुड़ी सेवाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं। इनमें सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल, वासोवासोस्टॉमी, वासोएपिडिडिमोस्टॉमी और माइक्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके अलावा ऐसे युवा कैंसर रोगियों के शुक्राणु सुरक्षित रखने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिनकी कीमोथेरेपी या बड़ी शल्य चिकित्सा से भविष्य में प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
एम्स जोधपुर के सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) केंद्र में पिछले दो वर्षों से सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और संबंधित प्रजनन उपचार सेवाएं उपलब्ध हैं। संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. शर्मा ने संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना कर रहे दंपतियों को समय पर चिकित्सकीय जांच और परामर्श लेने की सलाह दी है।
हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर