आईपीएस प्रशाखा माथुर एपीओ
जयपुर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। एक निजी कंपनी से चालीस विला-कॉटेज खरीदने के विवाद में राज्य सरकार की कार्रवाई का दायरा अब वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल के बाद उनकी आईपीएस पत्नी डॉ. प्रशाखा माथुर तक पहुंच गया है। सरकार ने शनिवार को 1995 बैच की आईपीएस अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) प्रशाखा माथुर को भी पदस्थापन की प्रतीक्षा में (एपीओ) कर दिया। कार्मिक विभाग ने शनिवार काे इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। हालांकि आदेश में एपीओ किए जाने का कारण प्रशासनिक बताया गया है। इससे पहले 29 अक्टूबर की रात सरकार ने 1993 बैच के आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को उनके सभी पदों से हटाकर एपीओ कर दिया था। अब आईएएस-आईपीएस दंपती दोनों पदस्थापन की प्रतीक्षा में हैं।
उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रशाखा माथुर 1995 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। वे 24 अक्टूबर 2025 से एडीजी पुलिस आयोजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर कार्यरत थीं। इससे पहले वे पुलिस मुख्यालय जयपुर में आईजी, एडीजी इंटेलीजेंस सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। सिरोही, जयपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा, पाली और अजमेर में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी भी संभाली। मूल रूप से अजमेर की रहने वाली प्रशाखा माथुर ने एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद सिविल सेवा में प्रवेश किया। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान वे 2009 से 2014 तक खुफिया ब्यूरो (आईबी) में अतिरिक्त उपनिदेशक और उपनिदेशक के पद पर भी रहीं।
शिखर अग्रवाल लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम विभाग के साथ दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनके और पत्नी प्रशाखा माथुर के साथ दोनों बेटों तथा सास-ससुर के नाम पर एक ही निजी कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मची हुई है। आरोप हैं कि शिखर अग्रवाल ने पद का दुरुपयोग कर निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। इसी मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को जांच के आदेश दिए गए हैं। एसीबी ने प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी है।
मामले में सामने आया है कि शिखर अग्रवाल के साथ प्रशाखा माथुर के नाम से भी उसी कंपनी से विला खरीदे गए थे। अनंता रिजॉर्ट के 40 विला में प्रशाखा माथुर की भी हिस्सेदारी बताई जा रही है। इनमें से कुछ संपत्तियों का उल्लेख उनके सालाना संपत्ति विवरण में किया गया है, जबकि अलवर में हुई खरीद का उल्लेख संपत्ति विवरण में नहीं होने की बात सामने आई है। इस पहलू को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संपत्ति खरीद, हितों के टकराव और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े बिंदुओं की जांच के दौरान प्रशाखा माथुर की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि उनके खिलाफ जांच या पूछताछ को लेकर किसी आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
एक परिवार के दो वरिष्ठ अधिकारियों के एपीओ होने के बाद राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दूसरी ओर विला खरीद मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को निशाने पर ले रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि कार्मिक और गृह विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं, ऐसे में मामले में सरकार की जवाबदेही बनती है। वहीं सत्ताधारी दल के नेता कार्रवाई को निष्पक्ष बता रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश