पति के अंगदान से प्रेरित होकर पत्नी ने किया देहदान
जोधपुर, 12 अक्टूबर (हि.स.)। जिंदगी जीने के कई तरीके होते हैं, लेकिन कुछ लोग अपने जाने के बाद भी समाज के लिए एक जीवंत रोशनी छोड़ जाते हैं। आमतौर पर लोग जीवनभर की कमाई या संपत्ति का दान करते हैं, लेकिन जोधपुर की 82 वर्षीय आशा गुप्ता ने मरणोपरांत अपनी देह का दान कर मानवता, शिक्षा और चिकित्सा विज्ञान के लिए एक ऐसा इतिहास लिख दिया, जो युगों-युगों तक समाज का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।
आशा गुप्ता का यह फैसला महज एक संयोग नहीं, बल्कि उनके घर में रचे-बसे महान संस्कारों की परिणति था। उनके दिवंगत पति रामकृष्ण गुप्ता ने अपने निधन के समय शरीर के अंगों का दान कर कई जिंदगियों को नया जीवन दिया था। पति के इस निष्काम सेवा भाव और त्याग से गहराई से प्रेरित होकर ही आशा ने भी अपनी देह को शिक्षा और शोध कार्य हेतु समर्पित करने का यह ऐतिहासिक निर्णय लिया था।
उन्होंने अपने निधन से कई वर्ष पूर्व ही अपने ज्येष्ठ पुत्र डॉ. रवि गुप्ता और पुत्रवधु डॉ. आभा गुप्ता के सामने अपनी इच्छा व्यक्त कर दी थी। इस महान इच्छा का पूर्ण सम्मान करते हुए परिजनों ने उनकी पार्थिव देह को डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी डिपार्टमेंट को सौंप दिया।
देहदान के इस गौरवशाली और प्रेरणादायी अवसर पर उनके पौत्र अविरल एवं पौत्र वधु शैफाली गुप्ता, पुत्री विनय राजवंशी, दामाद मुकुल राजवंशी सहित शहर के कई प्रतिष्ठित चिकित्सक और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इ
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश