भारत की पारंपरिक हर्बल एवं औषधीय वनस्पति संपदा अमूल्य धरोहर : डाॅ. राजेंद्र पुराेहित

 


बीकानेर, 05 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एन.आर.सी.सी.), बीकानेर में विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के अवसर पर आज विविध जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-जन तक पहुँचाना तथा प्राकृतिक संसाधनों, मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इस अवसर पर केन्द्र परिसर में पौधारोपण भी किया गया तथा केन्द्र परिवार सहित लगभग 130 सहभागी किसानों, पशुपालकों, विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों से पर्यावरण संरक्षण को जनांदोलन बनाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजेन्द्र कुमार पुरोहित, प्राचार्य, राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर ने ‘हरित कवच : विकिरण सुरक्षा के लिए औषधीय पादप आधारित समाधान’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारत की पारंपरिक हर्बल एवं औषधीय वनस्पति संपदा मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण सुरक्षा दोनों के लिए अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि ग्वारपाठा, आंवला, नीम, तुलसी एवं पुदीना जैसी वनस्पतियों के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण तथा स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। मुख्य अतिथि ने भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ को मृदा, कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस और ‘खेत बचाओ अभियान’ का साझा उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक है जब पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाए।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. श्याम सुंदर ज्याणी, सह आचार्य, राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर, आयोजन सचिव डॉ. बी. श्रीशैलम, केन्द्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अखिल ठुकराल ने अपनी बात कही।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. विश्वरंजन उपाध्याय, डॉ. एंटोनी जॉनसन टी., महेन्द्र कुमार राव, दिनेश मुंजाल, सतनाम सिंह, जितेन्द्र कुमार एवं डॉ. विनोद यादव सहित अन्य कार्मिकों का विशेष योगदान रहा। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्वागतिका प्रियदर्शिनी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव