उत्तर पश्चिम रेलवे ने की अप्रैल व मई 2026 में लगभग 6 मिलीयन टन माल की ढुलाई
जयपुर, 03 जून (हि.स.)। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों में माल ढुलाई के क्षेत्र में निरंतर वृद्धि दर्ज करते हुए मई 2026 तक 145 मिलियन टन माल की लोडिंग की है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 1.3 प्रतिशत अधिक है। रेलवे की इस उपलब्धि में लौह अयस्क, इस्पात, उर्वरक तथा अन्य वस्तुओं की माल ढुलाई में हुई वृद्धि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे ने भी इस अवधि में लगभग 60 लाख टन माल की लोडिंग की, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 16 प्रतिशत अधिक है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े अप्रत्यक्ष प्रभावों के बावजूद भारतीय रेलवे ने परिचालन की सतत निगरानी और संसाधनों के कुशल उपयोग के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध ढुलाई सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि रेलवे ने देशभर में माल परिवहन को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार अन्य विविध वस्तुओं की ढुलाई में 16 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जबकि लौह अयस्क की लोडिंग में 4.8 प्रतिशत और कच्चे लोहे एवं तैयार इस्पात की ढुलाई में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उर्वरकों की लोडिंग में भी 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने में रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।
कोयला अभी भी भारतीय रेलवे की माल ढुलाई का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है। मई 2026 तक कोयले की लोडिंग में लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रेलवे ने तापीय विद्युत संयंत्रों की जरूरतों को पूरा करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए कोयला परिवहन को प्राथमिकता दी तथा इसकी आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी।
रेलवे ने घरेलू और आयातित कंटेनर यातायात की निगरानी भी तेज की है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। इन प्रयासों के कारण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी माल ढुलाई की वृद्धि दर बरकरार रखने और आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता सुनिश्चित करने में सफलता मिली है।
यात्री परिवहन के क्षेत्र में भी भारतीय रेलवे का प्रदर्शन बेहतर रहा है। मई 2026 में रेलवे ने 61 करोड़ से अधिक यात्रियों को परिवहन सेवाएं प्रदान कीं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या लगभग 59 करोड़ थी। गैर-उपनगरीय खंड में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जहां यात्रियों की संख्या 28 करोड़ से बढ़कर 30 करोड़ हो गई। यह छोटी और लंबी दूरी की यात्राओं के लिए रेल परिवहन के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
गर्मी के मौसम में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे ने विभिन्न मार्गों पर बड़ी संख्या में ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेनों का संचालन किया। वहीं आधुनिक रेल सेवाओं के विस्तार के तहत देश में वर्तमान में 164 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं, जिनमें हाल ही में शुरू की गई हावड़ा-कामाख्या स्लीपर वंदे भारत सेवा भी शामिल है। इसके अलावा अमृत भारत ट्रेनों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है, जिनमें से तीन नई सेवाएं मई 2026 के दौरान शुरू की गईं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव