राजस्थान निकाय चुनाव : 28 नगर परिषदों में निर्दलीय निर्णायक, कई शहरों में बदले सियासी समीकरण
जयपुर, 14 सितंबर (हि.स.)। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के सोमवार को आए नतीजों ने स्थानीय राजनीति में दलों के पारंपरिक प्रभाव के साथ ही निर्दलीयों की बढ़ती भूमिका को भी सामने रखा है। राज्य की 47 नगर परिषदों और 252 नगर पालिकाओं के चुनाव परिणामों में 28 नगर परिषदों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में इन परिषदों में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है। वहीं 12 नगर परिषदों में भाजपा, छह में कांग्रेस और एक में आम आदमी पार्टी (आप) ने बहुमत हासिल किया है।
झालावाड़ में कांग्रेस की वापसी, बारां में आप का बहुमत
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ में कांग्रेस ने नगर निकाय चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया है। 45 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 13, निर्दलीयों को दो और आम आदमी पार्टी को एक वार्ड में सफलता मिली। कांग्रेस के बहुमत के साथ यहां बोर्ड गठन का रास्ता साफ हो गया है। वहीं बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को 18, भाजपा को नौ और निर्दलीयों को दो सीटें मिली हैं। बारां आप ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ते हुए नगर परिषद में अपना बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल की है।
सीकर में कांग्रेस का बहुमत, मतगणना के बाद विवाद
सीकर नगर परिषद में कांग्रेस ने 65 में से 38 वार्डों में जीत दर्ज कर बहुमत हासिल किया है। भाजपा को 22, निर्दलीयों को चार और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) को एक सीट मिली है। कांग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद मतगणना के बाद वार्ड 17 में कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच विवाद हो गया। इस दौरान पथराव में कई लोग चोटिल हुए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति नियंत्रित की और कई लोगों को हिरासत में लिया। सीकर में बोर्ड गठन के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्याबल है।
नागौर में निर्दलीय सबसे बड़ा समूह
नागौर नगर परिषद के परिणामों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। 60 वार्डों में निर्दलीयों ने 23, भाजपा ने 21 और कांग्रेस ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की है। एक वार्ड के परिणाम का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। निर्दलीय यहां सबसे बड़े समूह के रूप में उभरे हैं। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों को निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश करनी पड़ सकती है। नागौर में वार्ड सात से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामनिवास सांखला की हार भी चर्चा में रही। प्रमुख राजनीतिक चेहरों की हार और निर्दलीयों के मजबूत प्रदर्शन ने परिषद के भीतर सत्ता के समीकरण को और जटिल बना दिया है।
सीमावर्ती जिलों बाड़मेर और जैसलमेर में भाजपा ने बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल कर ली है। इन दोनों निकायों में भाजपा की सफलता स्थानीय संगठन और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
निकाय चुनावों में कई वार्डों के परिणामों ने मुकाबले की तीव्रता को भी उजागर किया। डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के वार्ड 13 में भाजपा प्रत्याशी कैलाश चंद को केवल एक वोट मिला। वहीं नागौर जिले की रियांबड़ी नगरपालिका के वार्ड 15 में कांग्रेस प्रत्याशी मजीद मोहम्मद को भी महज एक वोट प्राप्त हुआ।
राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों में एक ओर भाजपा और कांग्रेस ने कई परिषदों में बहुमत हासिल किया है, वहीं 28 नगर परिषदों में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे निकायों में बोर्ड गठन के लिए दलों को स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाना होगा। निर्दलीय पार्षदों का रुख, दलों के भीतर संभावित मतभेद और मेयर या सभापति पद के दावेदारों के बीच सहमति बोर्ड गठन की दिशा तय कर सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर