मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर, एचपीवी टीकाकरण के लिए बनेगी कार्ययोजना
जयपुर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने, उच्च जोखिम वाले मामलों की पहचान करने और किशोरियों तक एचपीवी टीकाकरण की पहुंच बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रयास तेज करने पर जोर दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और यूनिसेफ के संयुक्त समन्वय से जयपुर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए उनकी गुणवत्ता सुधारने पर मंथन किया गया।
प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व सभी आवश्यक जांच, नियमित निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका नियमित फॉलोअप करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यशाला में एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार करने, स्वास्थ्यकर्मियों के बीच समन्वय बढ़ाने और लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
साथ ही आमजन में टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत मीजल्स-रूबेला टीके की पहली एवं दूसरी खुराक सहित अन्य सेवाओं की समीक्षा की गई।
अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला ने कहा कि राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने निर्धारित लक्ष्यों को समय पर हासिल करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर उसके अनुसार काम करने की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, परियोजना निदेशक टीकाकरण डॉ. रघुराज सिंह तथा यूनिसेफ नई दिल्ली की टीम सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित