दो मार्च को होलिका दहन, तीन मार्च को धुलंडी
जयपुर, 25 फ़रवरी (हि.स.)। जयपुर सहित पूरे राजस्थान में रंगों और खुशियों का पर्व होली-धुलंडी इस वर्ष 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा। शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल गोविंददेव जी मंदिर में भी होली 2 मार्च को ही उत्साहपूर्वक मनाई जाएगी।
ज्योतिषविदों के अनुसार 2 मार्च की शाम 5:56 बजे से अगले दिन सुबह 5:32 बजे तक भद्रा रहेगा, वहीं पूर्णिमा की शुरुआत भी शाम 5:56 बजे से हो रही है। शास्त्रों के अनुसार इस स्थिति में भद्रा पुच्छ काल के समय मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन करना शुभ रहेगा। इस कारण इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि के बाद किया जाएगा।
जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से सिटी पैलेस में भी होलिका दहन दो मार्च की मध्यरात्रि में आयोजित होगा। परंपरा अनुसार सबसे पहले यहां होलिका दहन किया जाएगा और उसके बाद शहरभर में होली की उमंग फैलेगी।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार, तीन साल बाद होलिका दहन गोधूलि बेला के बजाय मध्यरात्रि बाद होगा। 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 5:56 बजे से अगले दिन शाम 5:08 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में पूर्णिमा होने के कारण, भद्रा पुच्छ काल में मध्यरात्रि बाद ही होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। इस वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात 1:26 बजे से 2:38 बजे तक रहेगा।
शर्मा के अनुसार बिहार, झारखंड, असम, दिल्ली, यूपी और पंजाब में इस वर्ष पर्व तीन और चार मार्च को मनाया जा रहा है। भद्रा काल को क्रोध और विघ्न का समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। भद्रा शनिदेव की बहन मानी जाती हैं और उनका स्वभाव उग्र होता है।
2 मार्च की मध्यरात्रि के बाद होलिका दहन होने के कारण 3 मार्च को राजस्थान में धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार होलिका दहन के अगले सूर्योदय पर ही धुलंडी का उत्सव आयोजित किया जाता है। इस प्रकार, जयपुर और प्रदेशभर में इस वर्ष होली का उत्सव पारंपरिक रीतियों के अनुसार उत्साह और भद्रा मुहूर्त का ध्यान रखते हुए मनाया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश