धुलंडी के रंग में रंगी राजधानी: फागुन की उमंग में झूमे लाेग
जयपुर, 03 मार्च (हि.स.)। प्रदेशभर में होली और धुलंडी का पर्व पूरे उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। धुलंडी के दिन चारों ओर एक ही गूंज सुनाई दी—‘बुरा न मानो, होली है।’ राजधानी जयपुर में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी होली के रंग में सराबोर नजर आए।
राजधानी जयपुर में सुबह से ही रंगों और उमंगों का उल्लास दिखाई देने लगा। लोगों ने एक-दूसरे को प्रेम और सद्भाव की फुहारों से भिगोया। परस्पर रंग, गुलाल और अबीर लगाकर होली खेली गई। इस दौरान सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की भी झलक देखने को मिली।
युवाओं की टोलियां चंग, ढफ और ढोल-नगाड़ों की थाप पर सड़कों पर मस्ती करती नजर आईं। लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के गले लगे और मिठाई खिलाकर बधाई दी। बच्चों में पिचकारी से रंग खेलने का विशेष उत्साह रहा। कई स्थानों पर युवक राहगीरों को भी रंग लगाते हुए ‘बुरा न मानो होली है’ कहते नजर आए।
इसके अलावा शहर के होटलों, रिसॉर्ट्स और गेस्ट हाउसों में भी होली का उल्लास छाया रहा। साथ ही देसी-विदेशी सैलानियों ने भी जमकर होली खेली। राजधानी घूमने आए विदेशी पर्यटक खुद को रंगों से दूर नहीं रख पाए और पूरे उत्साह से इस पर्व में शामिल हुए।
धुलंडी और रामा-श्यामा की परंपरा के तहत लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर नेह का गुलाल लगाया। ठंडी बयार, फागुन की छटा और रंगों का इंद्रधनुष उत्सव के उत्साह को और बढ़ाता नजर आया। लोकगीतों और संगीत से सराबोर फाग मंडलियों ने मधुर प्रस्तुतियों से माहौल को खुशनुमा बना दिया।
बच्चों, युवाओं, युवतियों, महिलाओं और बुजुर्गों की टोलियां आपस में रंग लगाते हुए दिखाई दीं। घरों में भी महिलाओं और बुजुर्गों ने प्रेम और अपनत्व के साथ होली मनाई। रंग, अबीर और गुलाल से सराबोर चेहरों के साथ राजधानी धुलंडी के रंग में पूरी तरह रंगी नजर आई। गौरतलब है कि ग्रहण और सूतक के कारण धुलंडी का पर्व भले ही चार मार्च बुधवार को मनाया जाएगा। लेकिन उत्सव का रंग मंगलवार को लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश