आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में 90 करोड़ ‘आभा’ खातों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
जयपुर, 02 जून (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में लगातार उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते प्रदेश ने यूनिक ‘आभा’ खातों के निर्माण में देशभर में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
राजस्थान में अब तक 7 करोड़ 19 लाख से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, जिसके साथ प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
वहीं, देशभर में वर्ष 2026 में आभा खातों की संख्या 90 करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। इसे भारत की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण से नागरिकों को अधिक पारदर्शी, सुगम और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत आभा खातों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां देशभर में 14.7 करोड़ आभा खाते बनाए गए थे, वहीं यह संख्या 2022 में बढ़कर 30.4 करोड़, 2023 में 50.6 करोड़, 2024 में 72.2 करोड़ और 2025 में 84.5 करोड़ तक पहुंच गई। अब 2026 में यह आंकड़ा 90 करोड़ से अधिक हो गया है।
राजस्थान में भी गांव-ढाणी से लेकर कस्बों और शहरों तक डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे मरीजों को इलाज में आसानी हो रही है और अस्पतालों में सेवा वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी है।
आभा यानी आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट एक विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या है। यह 14 अंकों की यूनिक हेल्थ आईडी होती है, जिसके माध्यम से मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संग्रहित किए जाते हैं।
इस आईडी के जरिए मरीज अपनी सहमति से अपने स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज, लैब रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची, दवाइयों का विवरण और पुरानी बीमारियों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकता है।
इससे कागजी दस्तावेज साथ रखने की आवश्यकता कम हो जाती है और जरूरत पड़ने पर मरीज कहीं भी आसानी से अपना हेल्थ रिकॉर्ड उपलब्ध करा सकता है।
आभा आईडी के जरिए मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री डिजिटाइज्ड होने से डॉक्टरों को उपचार के दौरान महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। मरीज की पुरानी बीमारियों, जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध होने से डॉक्टर कम समय में सही निर्णय ले पाते हैं और रोगी को समय पर बेहतर इलाज मिल पाता है।
विशेष बात यह है कि मरीज का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और उसकी अनुमति के बिना कोई भी डॉक्टर या अस्पताल उस जानकारी तक पहुंच नहीं सकता।
इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा दोनों मजबूत हो रहे हैं। इस डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र में आईएचएमएस (इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम) की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह एक एबीडीएम कम्प्लायंट सॉफ्टवेयर है, जिसके माध्यम से मरीजों की आभा आईडी के साथ इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए जाते हैं। इससे सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो पाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित