कचरा प्लांट के विरोध में हाईवे जाम, रात दो बजे प्रशासन से बनी सहमति

 




श्रीगंगानगर, 01 अक्टूबर (हि.स.)। नरसिंहपुरा-मांझूवास-बिरानी क्षेत्र में प्रस्तावित ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट के विरोध में चल रहे आंदोलन के बीच बुधवार देर रात प्रशासन और सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच सहमति बन गई। करीब चार घंटे तक सूरतगढ़-श्रीगंगानगर राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित रहने के बाद रात करीब दो बजे श्रीगंगानगर उपखंड अधिकारी नयन गौतम प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और प्रशासन के निर्णय की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांगों को जयपुर तक भेजा जाएगा और कचरा प्लांट के संबंध में गठित कमेटी पूरे मामले पर पुनर्विचार कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने हाईवे से जाम हटा लिया।

दरअसल, प्रस्तावित कचरा प्लांट के विरोध में क्षेत्र के ग्रामीण पिछले करीब पांच महीने से आंदोलन कर रहे हैं। बुधवार को नरसिंहपुरा-बिरानी क्षेत्र में ग्रामीणों की महापंचायत आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। महापंचायत में सांसद हनुमान बेनीवाल भी शामिल हुए।

उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को लेकर करीब 100 वाहनों के काफिले के साथ श्रीगंगानगर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया।

पुलिस ने महियावाली टोल नाके के पास चूनावढ़ थाना क्षेत्र में बेनीवाल के काफिले को रोक दिया। इसके बाद सांसद के समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन शुरू कर दिया और सड़क पर जाम लगा दिया। देखते ही देखते श्रीगंगानगर शहर की ओर जाने वाली सड़क पर करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पुलिस अधिकारियों ने बेनीवाल से बातचीत कर प्रदर्शन समाप्त करने की कोशिश की।

देर रात तक चली बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से उपखंड अधिकारी नयन गौतम प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और कमेटी कचरा प्लांट के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करेगी। तत्काल प्लांट का काम रोकने पर सहमति बनने के बाद प्रदर्शनकारियों ने हाईवे खोल दिया।

कचरा प्लांट को लेकर विवाद नया नहीं है। पहले श्रीगंगानगर के पास चक 6-जेड में प्लांट प्रस्तावित किया गया था, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। इसके बाद वर्ष 2016 में स्थान बदलकर शहर से करीब 7-8 किलोमीटर दूर नेतेवाला के चक 1-जी छोटी में प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। यहां करीब एक दशक तक सरकारी स्वीकृतियों और अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की प्रक्रिया चली। करीब 78 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत होने के साथ निर्माण का ठेका भी दिया गया था।

नेतेवाला में भी ग्रामीणों के विरोध के बीच प्रशासन ने इस वर्ष प्लांट को नरसिंहपुरा-मांझूवास-बिरानी क्षेत्र में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव रखा। नई जगह पर प्रस्ताव सामने आते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया और पिछले करीब पांच माह से आंदोलन जारी है। बुधवार रात हुए घटनाक्रम के बाद फिलहाल प्रशासन ने ग्रामीणों की मांगों पर पुनर्विचार के लिए कमेटी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और उनकी मांगों को जयपुर भेजने की बात कही है। इसी आश्वासन के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा जाम समाप्त हो सका।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित