जयपुर में पांच मई को होगी पीठासीन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति की बैठक
जयपुर, 04 मई (हि.स.)। देश के विभिन्न विधानमंडलों की समितियों को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के उद्देश्य से गठित पीठासीन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति की द्वितीय बैठक पांच मई को जयपुर स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी राजस्थान विधानसभा कर रही है।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने बैठक की तैयारियों और व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित इस समिति का उद्देश्य देशभर की विधानसभाओं की समिति प्रणाली की समीक्षा कर उसे और अधिक प्रभावी बनाना है।
इस बैठक में राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष भाग लेंगे।
समिति के सभापति मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर हैं। समिति की पहली बैठक भोपाल में आयोजित की गई थी, जबकि दूसरी बैठक जयपुर में हो रही है।
बैठक से पूर्व राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. देवनानी और समिति अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के बीच कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विस्तृत चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों से आए विधानसभा अध्यक्षों का जयपुर आगमन हो चुका है, जहां उनका स्वागत राजस्थान विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा ने किया।
डॉ. देवनानी ने बताया कि बैठक के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की उपस्थिति में पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सम्मान भोज आयोजित किया जाएगा। इसमें राजस्थान की लोकसंस्कृति, लोकगीत-संगीत और पारंपरिक व्यंजनों से अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।
बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों के स्पीकर्स राजस्थान विधानसभा के डिजिटल सदन, आधुनिक भवन, संग्रहालय, संविधान दीर्घा और वंदे मातरम् दीर्घा का अवलोकन करेंगे। साथ ही नक्षत्र वाटिका और हर्बल वाटिका का उद्घाटन भी किया जाएगा।
राजस्थान विधानसभा की पेपरलेस और डिजिटल प्रणाली को देशभर में मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां सदस्यों के लिए टैब आधारित कार्य प्रणाली और ऑनलाइन संसदीय प्रबंधन व्यवस्था लागू है।
इसके अतिरिक्त अतिथियों का खाटूश्याम मंदिर भ्रमण कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है, जहां वे दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे।
यह बैठक न केवल समिति प्रणाली की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि राजस्थान की डिजिटल प्रगति, सांस्कृतिक विरासत और सुशासन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित