स्वस्थ जीवनशैली से ही रुकेगा बच्चों में बढ़ता मोटापा: डॉ. जी. एस. तंवर

 


बीकानेर, 05 मार्च (हि.स.)। विश्व मोटापा दिवस के अवसर पर गुरुवार को बीकानेर में बच्चों में तेजी से बढ़ रही मोटापे की समस्या पर एक विशेष अभिभावक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। शिशु रोग विभाग, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर और बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में हुई इस कार्यशाला में अभिभावकों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जी. एस. तंवर ने बताया कि बदलती जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में मोटापे के मुख्य कारण बन रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय रहते स्वस्थ आदतें अपनाकर इस समस्या को रोका जा सकता है।

कार्यक्रम में प्रश्नोत्तर सत्र रखा गया, जिसमें लगभग 40 अभिभावकों ने सक्रिय भाग लिया। अभिभावकों के कई महत्वपूर्ण सवालों के विस्तृत जवाब डॉ. तंवर और वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने दिए।

बच्चे के वजन का सही आकलन कैसे करें, इस पर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि केवल वजन देखकर नहीं, बल्कि बीएमआई फार ऐज प्रतिशत चार्ट के आधार पर जांच करनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ ग्रोथ चार्ट की मदद से सही मार्गदर्शन देते हैं। यह धारणा गलत है कि मोटापा उम्र बढ़ने के साथ खुद-ब-खुद कम हो जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मोटे बच्चे बिना किसी हस्तक्षेप के मोटे वयस्क बन जाते हैं, इसलिए शुरुआती उम्र में ही जीवनशैली में सुधार बहुत जरूरी है। मोटापा सिर्फ ज्यादा खाने से नहीं होता। इसके कई अन्य कारण भी हैं, जैसे आनुवंशिक कारक, हार्मोनल असंतुलन, नींद की कमी, तनाव, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और अस्वस्थ खान-पान का वातावरण।

हार्मोनल समस्या का संदेह तब करना चाहिए जब वजन बढ़ने के साथ लंबाई कम बढ़ रही हो, नियंत्रित भोजन के बावजूद वजन तेजी से बढ़ रहा हो, यौन परिपक्वता में देरी हो रही हो या थायरॉइड से जुड़े लक्षण जैसे गर्दन में सूजन, कम ऊर्जा या बिना कारण कब्ज दिखाई दें। ऐसे में बाल रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

बच्चों को सख्त या क्रैश डाइट पर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि बढ़ते बच्चों को संतुलित पोषण की जरूरत होती है। भोजन की मात्रा नियंत्रित रखें, घर का पौष्टिक भोजन दें और नियमित समय पर भोजन कराएं। जंक फूड, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, न्यूट्रिशनली इनएप्रोप्रिएट फूड, कार्बोनेटेड पेय और शुगर से भरपूर पेय से पूरी तरह बचें। 5 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों और किशोरों के लिए रोजाना कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि आवश्यक है।

उन्‍होंने बताया कि अधिक स्क्रीन टाइम वजन पर बुरा असर डालता है, क्योंकि इससे शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और अनावश्यक स्नैकिंग की आदत बढ़ जाती है। मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम को 1-2 घंटे प्रतिदिन तक सीमित रखना चाहिए। यदि किशोर अपने शरीर को लेकर असहज महसूस कर रहे हों तो उन्हें आलोचना या तुलना से बचाएं, खुले संवाद को बढ़ावा दें, स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करें और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लें। मोटापे का मुख्य उपचार जीवनशैली में बदलाव है। दवाओं की जरूरत केवल बहुत गंभीर मामलों में विशेषज्ञ की देखरेख में होती है।

अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि वे खुद रोल मॉडल बनें। परिवार के साथ स्वस्थ भोजन करें, साथ में व्यायाम या खेलकूद करें और शरीर के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करें।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. जी. एस. तंवर ने अभिभावकों से अपील की कि आज की छोटी-छोटी स्वस्थ आदतें ही आने वाली पीढ़ी को मजबूत और स्वस्थ बनाएंगी। परिवार की सक्रिय भागीदारी, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और सीमित स्क्रीन टाइम से ही एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण संभव है।

इस कार्यशाला में डॉ. के. एस. बिठू, डॉ. कुलदीप सिंह बिठू, डॉ. अनिल लाहोटी, डॉ. सारिका स्वामी तथा डॉ. संजीव चाहर भी उपस्थित रहे। सभी विशेषज्ञों ने अभिभावकों को बचपन में मोटापे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया और समय रहते जीवनशैली में सुधार लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव