आधुनिक शोध, क्लीनिकल अनुभव और नवाचार पर केन्द्रित रही स्वास्थ्य विज्ञान संगोष्ठी

 


अजमेर, 09 अप्रैल(हि.स.)। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के इंटरडिसिप्लिनरी स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा ट्रांसफरमेटिव हेल्थ साइंसेस फाउंडेशन टू फ्रंटियर विषय पर एक अर्ध-दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञों द्वारा चार अत्यंत रोचक तकनीकी व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। यह संगोष्ठी विश्व स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रमों की कड़ी के अंतर्गत आयोजित की गई।

प्रो. नीरज गुप्ता, जेएलएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर ने “आक्युपेशनल लंग डिजीज : रिलेटिव अनटेंडेड हेल्थ हैज़ार्डस विषय पर व्याख्यान देते हुए व्यावसायिक स्वास्थ्य से जुड़े एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर उपेक्षित क्षेत्र पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही प्रो गुप्ता ने शोधकर्ताओं को क्लीनिकल प्रगति की रीढ़ बताते हुए राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के साथ भविष्य में सहयोग की इच्छा व्यक्त की, जिसमें उन्नत शोध सहयोग तथा श्वसन चिकित्सा विभाग की स्थापना का प्रस्ताव शामिल है।

वहीं प्रो. सरवनन मथेश्वरन,आईआईटी कानपुर ने “मेलेनिन एंड न्यू स्ट्रेटेजीज टू ओवरकम रेडिएशन - रिलेटेड इस्यू विषय पर अपने शोध प्रस्तुत किए । इसके साथ ही प्रो. विजय के. प्रजापति, दिल्ली विश्वविद्यालय ने ए रैशनली इंजीनियर्ड चिमरिक वैक्सीन फॉर इम्मुनोप्रोफिलसिस ऑफ़ विसेरल लीशमनियासिस विषय पर व्याख्यान देते हुए उपेक्षित रोगों के लिए आधुनिक वैक्सीन विकास के दृष्टिकोण को समझाया। सहायक प्रोफेसर डॉ. साई चैतन्य चिलिवेरी, आईआईटी कानपुर ने “एप्लीकेशन ऑफ़ एनएमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी इन हेल्थ साइंसेज विषय पर पर चर्चा करते हुए आधुनिक बायोमेडिकल शोध में उन्नत स्पेक्ट्रोस्कोपिक तकनीकों की भूमिका स्पष्ट की।

कुलपति प्रो आनंद भालेराव ने कहा कि स्वास्थ्य विज्ञान आज केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जैव प्रौद्योगिकी, डेटा विज्ञान, क्लीनिकल रिसर्च, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नवाचार का एक व्यापक अंतःविषयक क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का इंटरडिसिप्लिनरी स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज आने वाले समय में शोध, नवाचार और समाजोपयोगी स्वास्थ्य समाधान के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभरेगा।

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को तैयार करना है जो भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोज सकें।

डीन एकेडमिक्स प्रो. डी.सी. शर्मा ने स्वास्थ्य विज्ञान विद्यालय के भविष्य के विषय में कहा कि विभाग को इस प्रकार विकसित होना चाहिए कि विश्वविद्यालय की पहचान ही इस विभाग से बने।

वहीं संगोष्ठी के उद्घाटन संबोधन में इंटरडिसिप्लिनरी स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के संस्थापक डीन प्रो. सी.सी. मंडल ने विचार रखे। स्वास्थ्य विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश गुप्ता ने भी छात्रों को शोध-उन्मुख बने रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन स्वास्थ्य विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अनुराग सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष