जंगल में आजादी मिली पर चार दिन बाद मरू लोमड़ी का शिकार बना गोडावण
जैसलमेर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। विलुप्ति की कगार पर खड़े दुर्लभ गोडावण को जंगल में फिर से बसाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। जैसलमेर के सम स्थित प्रजनन केंद्र में पाले गए छह महीने के नर गोडावण को खुले जंगल में छोड़े जाने के महज चार दिन बाद मरू लोमड़ी ने शिकार बना लिया। 14 अक्टूबर को डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा गया यह पक्षी 18 अक्टूबर को पानी पीने के लिए गाजलर के एक कुंड पर पहुंचा था। इसी दौरान झाड़ियों में छिपी लोमड़ी ने उस पर हमला कर दिया।
सैटेलाइट से मिलने वाले संकेत बंद होने पर वैज्ञानिकों को अनहोनी की आशंका हुई। जब वन्यजीव विशेषज्ञों और क्षेत्रीय कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची तो वहां गोडावण के पंख और अन्य अवशेष मिले।
गोडावण की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उसके शरीर पर सैटेलाइट ट्रैकिंग उपकरण लगाया गया था। इसी के जरिए वैज्ञानिक उसकी लोकेशन और गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे। 18 अक्टूबर को जब सैटेलाइट संकेत मिलने बंद हुए तो फील्ड टीम मौके पर पहुंची। वहां पक्षी के अवशेष मिलने से उसके शिकार की आशंका सामने आई।
टीम ने ट्रैकिंग उपकरण बरामद कर लिया है। घटनास्थल से मिले खून के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं, ताकि घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
गोडावण को प्राकृतिक वातावरण में दोबारा बसाने के उद्देश्य से भारतीय वन्यजीव संस्थान और संबंधित विशेषज्ञों की ओर से चरणबद्ध योजना बनाई गई थी। सम स्थित प्रजनन केंद्र में पाले गए 11 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना थी। इनमें से दो गोडावणों को 4 अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जंगल में छोड़ा था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दो और नर गोडावणों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। अब एक गोडावण के शिकार की घटना के बाद बाकी सात पक्षियों को जंगल में छोड़ने की योजना फिलहाल रोक दी गई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम छोड़ने की प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रही है। हालांकि, जंगल में छोड़े गए अन्य तीन गोडावण सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक गोविंद सागर भारद्वाज के अनुसार, जंगल में शिकार होना प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है और ऐसे क्षेत्रों में लोमड़ियों की मौजूदगी स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि फील्ड टीमें लगातार गोडावणों की निगरानी कर रही हैं। इस घटना से संरक्षण अभियान का मनोबल कमजोर नहीं होगा, बल्कि मिशन को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।
गोडावण राजस्थान के मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की पहचान माना जाता है, लेकिन इसकी घटती संख्या ने इसे गंभीर संकटग्रस्त पक्षियों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। प्रजनन केंद्र में पाले गए पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में बसाना संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण चरण है। ऐसे में एक पक्षी का शिकार वैज्ञानिकों के सामने नई चुनौती लेकर आया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित