ढाक की गूंज के बीच दुर्गाबाड़ी में मां दुर्गा का भव्य स्वागत

 


जयपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। बनीपार्क स्थित जयपुर दुर्गाबाड़ी में शुक्रवार को महाषष्ठी पूजा के साथ शारदीय दुर्गा पूजा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार मां दुर्गा की मिट्टी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। ढाक और कांसा की मंगलध्वनि के बीच संपन्न धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा का स्वागत कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

जयपुर दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुदीप्तो सेन के अनुसार शाम को संध्या आरती के बाद ‘आगमनी संध्या’ के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मां दुर्गा के आगमन की खुशी और स्वागत से जुड़े पारंपरिक बंगाली आगमनी गीतों की प्रस्तुतियां दी गईं। इस वर्ष कार्यक्रम की मुख्य विषयवस्तु ‘सृष्टि, स्थिति और विनाश’ रही। गीत, संगीत और नृत्य के माध्यम से सृजन, संरक्षण और संहार के शाश्वत चक्र को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख आकर्षण ‘याज्ञसेनी’ नृत्य-नाटिका रही। इसका मंचन दुर्गाबाड़ी की महिला समिति के सदस्यों और बच्चों ने किया। कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में भारतीय परंपराओं, कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।

दुर्गाबाड़ी में शनिवार को महासप्तमी पूजा आयोजित की जाएगी। इस दौरान मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। दुर्गा पूजा महोत्सव के आगामी दिनों में भी धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश