विपक्ष पर मुकदमे तलाशने के बजाय जनता के सवालों का जवाब दे सरकार : डोटासरा
जयपुर, 05 नवंबर (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर निशाना साधते हुए भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। गुरुवार को कांग्रेस वॉर रूम में मीडिया से बातचीत में उन्होंने जयपुर के रामलीला मैदान में आयोजित भाजपा के कार्यक्रम को लेकर कहा कि भाजपा दिल्ली में कांग्रेस की रैली से व्यापारियों को नुकसान होने का सवाल उठाती है, जबकि जयपुर में अपने कार्यक्रम से परकोटे के व्यापारियों और आमजन को परेशान किया। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में दो से ढाई हजार कुर्सियां लगाई गई थीं, जिनमें करीब पांच साै भाजपा कार्यकर्ता और पांच साै पुलिसकर्मी थे। आम जनता की भागीदारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। दीपावली से पहले व्यापारी ग्राहकों का इंतजार करते रहे, लेकिन भाजपा को उनकी परेशानी नजर नहीं आई।
डोटासरा ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए भरतपुर में भाजपा के पूर्व विधायक की पीट-पीटकर हत्या, जयपुर में चार्टर्ड अकाउंटेंट के अपहरण और बजरी माफिया की ओर से पुलिसकर्मियों पर गाड़ियां चढ़ाने की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में रोजाना आठ करोड़ रुपए की बजरी चोरी होने की बात सरकार का एक मंत्री कह चुका है, फिर भी माफिया पर प्रभावी अंकुश नहीं है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान भाजपा विधायकों, प्रत्याशियों और नेताओं ने कलेक्टर व एसडीएम पर नाम काटने का दबाव बनाया तथा 20 से 25 हजार तक फॉर्म दिए गए। उन्होंने देशभर में 13 करोड़ नाम काटे जाने के मुद्दे पर भी जवाब मांगा। नीट-2026 पेपर लीक का उल्लेख करते हुए करीब 200 लोगों की गिरफ्तारी और एफआईआर के बावजूद सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तीन साल से पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रही है, लेकिन घटनाएं रुक नहीं रही हैं।
राइजिंग राजस्थान को लेकर डोटासरा ने कहा कि मुख्यमंत्री 12 लाख करोड़ रुपए के निवेश का दावा करते हैं, लेकिन धरातल पर कितना निवेश आया और कितने युवाओं को रोजगार मिला, इसका हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने निवेश, विदेश यात्राओं पर खर्च, रोजगार सृजन और जमीन आवंटन का पूरा ब्योरा जारी करने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार चहेते उद्योगपतियों और नेताओं को सस्ती दरों पर जमीनें आवंटित कर रही है।
मुख्यमंत्री की भाषा पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और मुख्यमंत्री पद पर बैठने से कोई व्यक्ति सर्वज्ञ नहीं हो जाता। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ की गई टिप्पणियों को निंदनीय बताते हुए कहा कि गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री, तीन बार केंद्रीय मंत्री और छह बार विधायक रहे हैं। ऐसे वरिष्ठ नेता के बारे में मर्यादित भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए।
आरपीएससी सदस्यों की नियुक्तियों पर डोटासरा ने कहा कि वसुंधरा राजे सरकार के समय अपनाई गई प्रक्रिया का ही पालन गहलोत और वर्तमान सरकार कर रही हैं। भाजपा ने अब तक कोई नई पारदर्शी प्रक्रिया नहीं बनाई। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री ने सदस्यों की नियुक्ति से पहले उनका लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन केवल आरोप लगने से किसी को अपराधी नहीं माना जा सकता।
आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े प्रकरण पर उन्होंने मुख्यमंत्री से तथ्यों के साथ जवाब देने की मांग की। महेश जोशी का बार-बार नाम लिए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत से दोषी साबित हुए बिना किसी को अपराधी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्वयं की निष्पक्ष जांच कराने की चुनौती भी दी।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के आंदोलनों के बाद मुख्यमंत्री डीजीपी और पुलिस अधिकारियों को बुलाकर विपक्षी नेताओं के खिलाफ मुकदमे तलाशने के निर्देश देते हैं। राहुल गांधी पर भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने के लिए ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जांच से नहीं डरती, लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण डराने-धमकाने की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। भाजपा सरकार को तीन साल के कार्यकाल में अपने वादों, योजनाओं, विकास कार्यों और नीतियों का हिसाब देना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश