मेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर गहलोत ने उठाए सवाल, बोले- संख्या नहीं गुणवत्ता चाहिए

 


जयपुर, 14 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश सहित देशभर में मेडिकल कॉलेजों को मिल रही मान्यताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता हासिल करने की होड़ मची हुई है, लेकिन बुनियादी सवालों की अनदेखी की जा रही है।

गहलोत ने आरोप लगाया कि कई निजी मेडिकल कॉलेजों में कॉलेज तो खोल दिए गए, लेकिन उनके पास पर्याप्त अस्पताल नहीं हैं। कहीं अस्पताल उपलब्ध है भी तो मरीजों की संख्या इतनी नहीं है कि मेडिकल छात्रों को पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव मिल सके। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कई संस्थानों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त फैकल्टी तक उपलब्ध नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज भी फैकल्टी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार, जब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का निरीक्षण होता है तो कई बार दूसरी जगहों से फैकल्टी बुलाकर मान्यता हासिल कर ली जाती है। गहलोत ने कहा कि इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। चिकित्सा जैसे पेशे में केवल मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि हर मेडिकल डिग्री के पीछे किसी मरीज की जिंदगी जुड़ी होती है।

गहलोत ने देशभर में मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी देने में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों के बीच सीबीआई द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी से जुड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी ने भी इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में जहां डॉक्टरों की जरूरत सबसे ज्यादा है, वहां भावी डॉक्टरों की योग्यता पर सवाल उठना बेहद चिंताजनक है। केंद्र सरकार, एनएमसी और राज्य सरकारों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी, अस्पताल, मरीजों की संख्या और अन्य बुनियादी सुविधाएं वास्तव में मौजूद हैं या सिर्फ कागजों पर दिखाई जा रही हैं।

गहलोत ने चिंता जताई कि जब चिकित्सा जैसे गंभीर क्षेत्र में व्यवस्थाओं की यह स्थिति है तो देश की मेडिकल साइंस और चिकित्सा शिक्षा की साख पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की कथित चुप्पी को भी चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इतने बड़े संकट पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित