प्रसूताओं की मौत पर गहलोत का हमला, बोले- सरकार सो रही, पीड़ितों के इलाज और मुआवजे की ले जिम्मेदारी

 


जालोर, 22 जून (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जालोर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जोधपुर के पावटा क्षेत्र में संक्रमण के कारण प्रसूताओं की मौत और महिलाओं के बीमार होने की घटनाओं को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कोटा में भी ऐसी घटना में पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है और कई महिलाओं की किडनियां फेल हो गई हैं, जिन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करवाना पड़ रहा है।

गहलोत ने कहा कि अब जोधपुर में भी आठ महिलाओं के गंभीर संक्रमण की खबर सामने आई है। इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी सरकार पूरी तरह सोई हुई है। उन्होंने मांग की कि जिन महिलाओं की मौत हुई है, उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और जिन महिलाओं की हालत गंभीर है, उनके इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए। यदि किसी महिला को किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है तो उसका पूरा खर्च सरकारी स्तर पर उठाया जाना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जैसी घटनाओं का बार-बार होना किसी गंभीर संक्रमण की ओर इशारा करता है। यदि एफएसएल रिपोर्ट आने में देरी हो रही है तो नमूनों को तुरंत दिल्ली, मुंबई या कोलकाता के विशेषज्ञ संस्थानों में भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से प्रदेशभर की गर्भवती महिलाओं में भय का माहौल है और वे अस्पतालों में प्रसव को लेकर चिंतित हैं।

चिकित्सा मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि सरकार के कई मंत्री गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी कर रहे हैं और प्रदेश में चिंताजनक स्थिति बनी हुई है।

मुख्यमंत्री की चौपाल पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि असली चौपाल वह होती है, जिसमें गांव के सभी लोगों को अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखने का अवसर मिले और वहीं समाधान के निर्देश दिए जाएं। वर्तमान में केवल चुनिंदा लोगों को बुलाया जा रहा है, जिससे चौपाल का उद्देश्य ही खत्म हो गया है।

पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव समय पर नहीं करवाने के मुद्दे पर गहलोत ने कहा कि संविधान के तहत समय पर चुनाव कराना आवश्यक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हार के डर से पंचायत चुनाव टाल रही है। उन्होंने कहा कि संविधान और न्यायपालिका के निर्देशों की अनदेखी करने वाली सरकार नैतिक रूप से सत्ता में बने रहने का अधिकार खो देती है।

गहलोत ने लोकतंत्र को खतरे में बताते हुए युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हुईं तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित