खरगे के बयान पर भाजपा के हंगामे को लेकर गहलोत का पलटवार, बोले—जनता के असली मुद्दों पर जवाब दे भाजपा
जयपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर भाजपा की ओर से जताए जा रहे विरोध के बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पलटवार किया है। गहलोत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर खरगे का बचाव किया और भाजपा पर राजनीतिक मुद्दों को तूल देकर जनता के वास्तविक सवालों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि खरगे का उद्देश्य प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत अपमान करना नहीं था और उनकी मंशा प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ नहीं हो सकती।
गहलोत ने अपने बयान में कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे देश के सबसे अनुभवी राजनेताओं में से एक हैं और प्रधानमंत्री पद की गरिमा को समझते हैं। उन्होंने दलील दी कि आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले कई मुहावरे और लोकोक्तियां भावनात्मक एवं अलंकारिक अर्थों में कही जाती हैं।
उनके अनुसार, खरगे की टिप्पणी को भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे पर हंगामा करने के बजाय जनता से जुड़े गंभीर सवालों पर जवाब देने की जरूरत बताई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए वर्ष 2019 का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर टिप्पणी की थी, तब भाजपा नेताओं को मर्यादा की चिंता क्यों नहीं हुई? गहलोत ने सवाल किया कि भाजपा आज भाषा की मर्यादा को लेकर सवाल उठा रही है, लेकिन पहले के राजनीतिक बयानों पर उसका रवैया क्या था।
गहलोत ने कहा कि भाजपा को प्रत्येक मुद्दे पर राजनीति करने और जनता का ध्यान भटकाने के बजाय लोकतंत्र से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए।
उनके मुताबिक, खरगे के बयान पर भाजपा का विरोध जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है। गहलोत ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे की जनसभा के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े लोगों ने ऐसा किया था। गहलोत ने इसे दलितों के प्रति विचारधारा और व्यवहार से जुड़ा सवाल बताते हुए भाजपा से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को संसद में भी उठाया था और भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने जांच कराने की बात कही थी। गहलोत ने सवाल किया कि उस जांच का क्या हुआ और उसके नतीजे सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए।
उन्होंने इसे भाजपा की कथनी और करनी के बीच अंतर का उदाहरण बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश के सामने वोट चोरी के आरोप और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं। गहलोत के अनुसार, कांग्रेस, युवा वर्ग और विपक्ष लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर इन सवालों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि जब विपक्ष और युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाते हैं, तो भाजपा को आरोपों का जवाब देना चाहिए, न कि उन्हें विदेशी ताकतों से जोड़कर उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने चाहिए।
गहलोत की एक्स पोस्ट में भाषा की मर्यादा से शुरू हुआ विवाद आगे बढ़कर राजनीतिक आचरण, दलित सम्मान, जांच की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता तक पहुंच गया।
गहलोत ने भाजपा से इन मुद्दों पर जवाब देने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि खरगे के बयान को लेकर विवाद खड़ा करने के पीछे जनता के अहम सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित